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Shimla News: आयुष्मान योजना से भी प्रोस्टेट कैंसर का इंजेक्शन मिलना बंद

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एक्सक्लूसिव
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मरीजों को जेब पैसे खर्च करके खरीदने पड़ रहे इंजेक्शन, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में मरीजों को हो रही परेशानी
सिविल सप्लाई की दुकानों का बकाया भुगतान भी लंबित
आदित्य सोफत
शिमला। हिमकेयर योजना के बाद अब केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना के तहत भी प्रोस्टेट कैंसर का इंजेक्शन मिलना बंद हो गया है। इसके चलते मरीजों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है और उन्हें मजबूरी में अपनी जेब से पैसे खर्च कर इंजेक्शन खरीदने पड़ रहे हैं। इससे मरीजों पर अचानक आर्थिक बोझ बढ़ गया है।

हैरत की बात यह है कि प्रदेश के प्रमुख सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में ही यह इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में प्रदेश के अन्य जिलों के अस्पतालों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। इससे मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि सरकार की ओर से सिविल सप्लाई की दवा दुकानों का बकाया भुगतान समय पर नहीं हो पाया है। इसके कारण बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही है, जिसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार प्रोस्टेट कैंसर के इंजेक्शन पर बारकोड नहीं होने से यह समस्या पैदा हुई है। बारकोड के अभाव में आयुष्मान भारत योजना के तहत सिविल सप्लाई की दवा दुकानों को क्लेम नहीं मिल पा रहा है। इस वजह से अस्पताल में योजना के तहत इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। योजना का लाभ नहीं मिलने से मरीजों को अब यही इंजेक्शन बाजार से करीब 12 हजार रुपये में खरीदना पड़ रहा है।
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आगे भी बनी रह सकती है दिक्कत
सिविल सप्लाई की दवा दुकानों में जब तक बारकोड युक्त इंजेक्शन की नई खेप नहीं पहुंचती, तब तक मरीजों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा। ऐसे में मरीजों को अपनी जेब से पैसे खर्च कर यह महंगा इंजेक्शन खरीदना पड़ेगा। अब तक आयुष्मान योजना के तहत यह इंजेक्शन मुफ्त मिलने से प्रोस्टेट कैंसर के मरीजों को बड़ी राहत मिल रही थी।


केस स्टडी
दिनेश ने बताया कि वह अपने पिता के उपचार के लिए सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना आए थे। डॉक्टरों ने उनके पिता के लिए प्रोस्टेट कैंसर का इंजेक्शन लिखा। वह इंजेक्शन लेने सिविल सप्लाई की दवा दुकान पर पहुंचे तो संचालक ने आयुष्मान भारत योजना के तहत इंजेक्शन देने से इन्कार कर दिया। उनका कहना था कि सरकार से पहले का भुगतान ही नहीं मिला है, इसलिए वह आगे स्टॉक उधार पर उपलब्ध नहीं करा सकते। मजबूरी में दिनेश को बाजार से पैसे देकर इंजेक्शन खरीदना पड़ा।
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कोट
इंजेक्शन पर बारकोड नहीं होने से आयुष्मान भारत योजना के तहत क्लेम नहीं हो पा रहा था। सिविल सप्लाई को बारकोड युक्त नई खेप उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। जल्द ही अस्पताल में इंजेक्शन उपलब्ध हो जाएगा।
– डॉ. सुधीर शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, चमियाना।
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