मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अतुल कौशिक
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हिमाचल में स्थित 17 निजी विश्वविद्यालयों की जल्द ही हर छोटी-बड़ी जानकारी एक क्लिक पर मिल जाएगी। राज्य निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग फर्जीवाडे़ को रोकने के लिए ऑनलाइन मैनेजमेंट सिस्टम बनाने में जुट गया है। शुक्रवार को न्यू शिमला स्थित आयोग कार्यालय में प्रेस वार्ता में नए अध्यक्ष मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अतुल कौशिक ने कहा कि पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही के लिए प्लान तैयार कर लिया गया है। ऑनलाइन मैनेजमेंट सिस्टम के तहत रियल टाइम डाटा वेबसाइट पर अपलोड होगा। मुख्य सचिव ने इसकी मंजूरी दे दी है।
आईटी विभाग के साथ मिलकर वेबसाइट बनाई जाएगी। इसमें विद्यार्थियों की संख्या, पढ़ाए जा रहे कोर्स, शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता, फीस स्ट्रक्चर आदि की जानकारी अपडेट होती रहेगी। इस तकनीक से फर्जी डिग्रियों का खेल खत्म होगा। नियमों की अवहेलना होते ही आयोग के पास अलर्ट आ जाएगा। अध्यक्ष ने बताया कि सभी निजी विवि के वीसी, रजिस्ट्रार और शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता और आयु से संबंधित दस्तावेज अलग से मंगवाए गए हैं। शिक्षकों को दिए जा रहे वेतन को लेकर शपथपत्र भी मांगा है।
उन्होंने कहा कि कोरोना संकट के बीच कोई निजी विवि ट्यूशन फीस से अधिक फीस लेता पाया गया तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऑनलाइन पढ़ाई की जांच के लिए भी एक मानीटरिंग सैल गठित करने का फैसला लिया गया है। बीते दो सप्ताह में पांच निजी विश्वविद्यालयों को लेकर आयोग के पास करीब 150 शिकायतें आई हैं। अधिक फीस लेने, शिक्षकों को वेतन नहीं देने, ऑनलाइन पढ़ाई नहीं करवाने, कुछ संस्थान बंद रहने से संबंधित ये शिकायतें हैं। इनकी जांच जारी है। इस अवसर पर आयोग के सदस्य प्रोफेसर कमलजीत और सचिव सुषमा वत्स भी मौजूद रहे।
स्थानीय लोगों से करवाएंगे निजी विवि का सोशल ऑडिट
शिमला। प्रदेश में स्थित निजी शिक्षण संस्थानों का अब स्थानीय लोगों से सोशल ऑडिट भी करवाया जाएगा। संस्थान के बारे में लोगों का क्या सोचना है, क्या कमियां और सुझाव हैं, इसकी जानकारी सोशल आडिट से जुटाई जाएगी।
मानव भारती विवि के विद्यार्थी अन्य जगह ले सकेंगे दाखिले
फर्जी डिग्री मामले में घिरे सोलन के मानव भारती विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी अन्य संस्थानों में दाखिले लें सकेंगे। इसे लेकर आयोग ने सरकार को प्रस्ताव भेजा है। एक-दो दिन के भीतर इस विवि में सरकार की ओर से प्रशासक भी नियुक्त कर दिया जाएगा। आयोग के अध्यक्ष ने प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटों के आवंटन को लेकर दोबारा विचार करने का प्रस्ताव भेजा है।