ऐसे में यह स्पष्ट है कि जो भी कोई संस्थान राज्य विधानसभा की ओर से पारित कानून के मुताबिक स्थापित हैं, वे सभी आरटीआई एक्ट की धारा 2(एच) के तहत आते हैं।
शिमला के घणाहट्टी क्षेत्र के जनोग गांव निवासी राहुल पराशर ने एपीजी यूनिवर्सिटी से सूचना मांगी। यूनिवर्सिटी ने दलील दी कि निजी विश्वविद्यालय आरटीआई एक्ट के दायरे में नहीं आती।
इसके बाद पराशर ने सूचना आयोग में अपील की। इसी मामले में सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि एपीजी यूनिवर्सिटी पब्लिक अथॉरिटी है। यह आरटीआई एक्ट के प्रावधानों के तहत जवाब देने के लिए ड्यूटी बाउंड है।
इसे न केवल पीआईओ की तैनाती करनी होगी, बल्कि आरटीआई एक्ट के वैधानिक प्रावधानों की भी अनुपालना करनी होगी। यूनिवर्सिटी को आवेदक को मुफ्त में सूचना देनी होगी।