एक निजी शिक्षण संस्थान में रैगिंग का मामला सामने के बाद हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग ने सख्ती दिखाई है। आयोग ने सभी निजी संस्थानों से एंटी रैगिंग कमेटियों के गठन के बारे में और उनकी गतिविधियों का ब्योरा तलब किया है।
आयोग ने ये निर्देश बेल्स इंस्टीट्यूट की तरह ऐसे संस्थानों में रैगिंग की घटनाओं को रोकने के लिए जारी किए हैं। इस संस्थान की अथारिटी को आयोग ने तलब किया तो उन्होंने माना कि उनके हॉस्टल में रैगिंग की घटना को बाहरी लोगों की मदद से एक विद्यार्थी ने अंजाम दिया।
परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश और विद्यार्थियों की सुरक्षा को सुनिश्चित नहीं कर पाने को भी इस संस्थान की अथारिटी को जिम्मेवार ठहराया। आयोग ने सू-मोटो लेते हुए बेल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नालॉजी मैहली शिमला के प्रधानाचार्य और वार्डन को रैगिंग का मामला सामने आने पर समन भेजा।
इन दोनों से मामले पर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए स्थिति साफ करने को कहा है। आयोग के सदस्य की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि संस्थान की अथारिटी ने इस बात को स्वीकार किया है कि सात और आठ सितंबर की रात को इनके हॉस्टल में रैगिंग की घटना हुई।
संस्थान के एक विद्यार्थी ने कुछ बाहरी लोगों के साथ हॉस्टल में अन्य विद्यार्थियों को परेशान किया। आयोग ने इस मामले का कड़ा संज्ञान लिया और ये माना कि संस्थान की अथारिटी को जिम्मेवार करार दिया जाना चाहिए कि बाहरी लोगों ने कै से कैंपस में प्रवेश कर लिया। परिसर में विद्यार्थियों के रहने के मामले पर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
पहले भी जारी किए हैं निर्देश
आयोग ने पहले से ही सभी निजी संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि वे एंटी रैगिंग कमेटियां बना लें। एंटी रैगिंग एक्ट के प्रावधानों को गंभीरता से लागू किया जाए। यही नहीं, इन कमेटियों को विद्यार्थियों से निरंतर संवाद बनाना चाहिए।