हिमाचल प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों को नशे के चंगुल से मुक्त करने के लिए कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश की जेलों में वर्तमान में 42 फीसदी कैदी एनडीपीएस एक्ट के तहत सजा काट रहे हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कारागार विभाग ने प्रदेश सरकार, उच्च न्यायालय और केंद्रीय गृह सचिव के समक्ष कैदियों के पुनर्वास और नशा मुक्ति के लिए ठोस पहल करने का मामला उठाया है। जेलों में कैदियों के लिए डि-एडिक्शन प्रोग्राम को प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। सभी प्रमुख जेलों में स्थायी तौर पर डॉक्टरों की तैनाती की जाएगी, ताकि कैदियों को नियमित नशा मुक्ति उपचार उपलब्ध हो सके।