कंडा जेल परिसर की दीवारों की ऊंचाई करीब 16 फुट ऊंची है। इन्हें लांघना आसान नहीं है। जेल परिसर में तीन शिफ्टों में ड्यूटी देते है। रात के समय 18 वार्डरों की शिफ्टों में ड्यूटी होती है। सभी कैदियों को ताले के भीतर बैरक में बंद किया जाता है। बैरकों में कोई गड़बड़ तो नहीं हो रही, इस पर इन गार्डों की नजर रहती है। इसके अलावा परिसर के बाहर चारों ओर जंगल है।
1999 में हुआ था सबसे बड़ा जेल ब्रेक
प्रदेश के केंद्रीय और जिला जेलों से कैदियों के भागने का पुराना इतिहास रहा है। कंडा जेल में सितंबर 2017 में तीन कैदी भाग गए थे। इसके अलावा 2015 में हमीरपुर की जेल से पांच कैदियों ने एक साथ भागकर जेल प्रशासन की जेलों में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोल दी थी। इनमें कुछ कैदियों को पकड़कर दोबारा जेल भेज दिया गया। 2011 में कैथू जेल से भी नेपाली कैदी फरार हुए। बिलासपुर और कुल्लू से भी नेपाली बंदी फरार हो चुके है। साल 1999 में नाहन जेल में सबसे बड़ा जेल ब्रेक हुआ था। इसमें सनसनीखेज हत्या के मामले में नाहन जेल में निरुद्घ श्याम दाऊ रेड्डी फरार हो गया था।