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कंडा जेल की ‘कड़ी सुरक्षा’ को चकमा दे कैदी ने बैरक में पहुंचा दिया मोबाइल

Fri, 14 Jun 2019 11:17 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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कंडा जेल(फाइल फोटो)
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केंद्रीय आदर्श कंडा जेल की सुरक्षा में कैदी ने सेंध लगा दी। हरियाणा का कैदी जेल के बैरक तक मोबाइल ले गया और सुरक्षा में तैनात वार्डरों को इसकी भनक भी नहीं लग सकी। आरोपी अपने मंसूबों में कामयाब रहता, इससे पहले ही जेल प्रशासन ने आरोपी से मोबाइल फोन जब्त कर कब्जे में लिया है।

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जेल प्रशासन का दावा है कि आरोपी ने अन्य एक आरोपी के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया है। सवाल ये उठता है कि कैदी ने आखिर कैसे सुरक्षा गार्डों की तैनाती और जेल परिसर में लगे करीब 43 सीसीटीवी कैमरों को चकमा देकर मोबाइल फोन बैरक के अंदर तक पहुंचाया। 

कंडा में जेल प्रशासन ने बैरकों में सर्च ऑपरेशन चलाया था। अधिकारियों ने गहनता से की गई सर्च के दौरान एक कैदी से चेकिंग के दौरान मोबाइल फोन बरामद हुआ था। जेल प्रशासन के मुताबिक सर्च अभियान में बैरक नंबर 2 में आरोपित जसवीर से मोबाइल फोन मिला है।
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जसवीर के अलावा बैरक में करीब 12 से 15 कैदी थे। इसके अलावा इस मामले में संलिप्त अन्य कैदी बैरक नंबर 3 में रहता है। जब दोनों आरोपी अलग-अलग बैरकों में रहते है तो आखिर कैसे इन्होंने सुरक्षा गार्डों को चकमा देकर मोबाइल फोन को बैरक के अंदर पहुंचाया। जेल प्रशासन मामले की जांच कर रहा है। 

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16 फीट ऊंची हैं जेल की दीवारें 

कंडा जेल(फाइल फोटो)
कंडा जेल परिसर की दीवारों की ऊंचाई करीब 16 फुट ऊंची है। इन्हें लांघना आसान नहीं है। जेल परिसर में तीन शिफ्टों में ड्यूटी देते है। रात के समय 18 वार्डरों की शिफ्टों में ड्यूटी होती है। सभी कैदियों को ताले के भीतर बैरक में बंद किया जाता है। बैरकों में कोई गड़बड़ तो नहीं हो रही, इस पर इन गार्डों की नजर रहती है। इसके अलावा परिसर के बाहर चारों ओर जंगल है।

1999 में हुआ था सबसे बड़ा जेल ब्रेक
प्रदेश के केंद्रीय और जिला जेलों से कैदियों के भागने का पुराना इतिहास रहा है। कंडा जेल में सितंबर 2017 में तीन कैदी भाग गए थे। इसके अलावा 2015 में हमीरपुर की जेल से पांच कैदियों ने एक साथ भागकर जेल प्रशासन की जेलों में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोल दी थी। इनमें कुछ कैदियों को पकड़कर दोबारा जेल भेज दिया गया। 2011 में कैथू जेल से भी नेपाली कैदी फरार हुए। बिलासपुर और कुल्लू से भी नेपाली बंदी फरार हो चुके है। साल 1999 में नाहन जेल में सबसे बड़ा जेल ब्रेक हुआ था। इसमें सनसनीखेज हत्या के मामले में नाहन जेल में निरुद्घ श्याम दाऊ रेड्डी फरार हो गया था।
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