हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार/भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल।
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हिमाचल प्रदेश में होने वाले नगर निकाय चुनाव इस बार महज स्थानीय स्तर पर सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इन्हें आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा है। हिमाचल में डेढ़ साल बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। खास बात यह है कि नगर निगम चुनाव पार्टी चिह्न पर लड़े जाएंगे, जिससे कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए यह प्रतिष्ठा का बड़ा सवाल बन गया है। नगर निगम के साथ-साथ नगर परिषद (नप) और नगर पंचायत (नप) के चुनाव पर भी राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।
चार नगर निगमों में धर्मशाला, पालमपुर, सोलन और मंडी में चुनाव हो रहा है। मंत्रियों और विधायकों पर अहम जिम्मेवारी रहेगी। बड़ी बात यह है कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बनने के बाद यह पहला बड़ा निकाय चुनाव होगा, ऐसे में सरकार के कामकाज की भी अपरोक्ष रूप से परीक्षा मानी जा रही है।
वहीं भाजपा इन चुनावों के जरिये सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करेगी। चुनाव को लेकर दोनों ही दलों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं को भी चुनावी प्रचार का हिस्सा बनाया जाएगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नगर निगमों में जीत से न केवल पार्टी की साख बढ़ेगी, बल्कि इसका सीधा असर आने वाले विधानसभा चुनाव पर भी पड़ेगा। यदि कोई नेता अपने क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करता है, तो उसकी दावेदारी मंत्रिमंडल के बचे हुए दो पदों के लिए मजबूत हो सकती है। भाजपा भी इन चुनावों को हल्के में लेने के मूड में नहीं है।
विकास के मुद्दे पर जनता के बीच जाएंगे
कांग्रेस निकाय चुनावों में विकास और जनहित के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी। हमें भरोसा है कि लोग हमारी नीतियों और काम के आधार पर हमें समर्थन देंगे। - विनय कुमार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
हर वार्ड में जीत दर्ज करना लक्ष्य
भाजपा संगठन मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी और हर वार्ड में जीत दर्ज करने का लक्ष्य है। जनता के विश्वास और केंद्र-राज्य की उपलब्धियों के आधार पर बेहतर प्रदर्शन करेंगे। - राजीव बिंदल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष