दीक्षांत समारोह में मेधावियों को प्रेरक भाषण में राष्ट्रपति ने कहा, भारत आज तीन-चार दशक पहले वाला देश नहीं है। दुनिया का भारत के प्रति नजरिया बदला है।
उन्होंने बुल्गारिया का जिक्र करते हुए कहा कि कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रधानमंत्रियों में भारत के बुलावे पर यहां आने की होड़ मची है। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था 7.3 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रही है।
युवाआें के सामने वैज्ञानिक, इंजीनियर, उद्यमी, चिकित्सक और व्यवसायी बनने के असंख्य अवसर हैं। युवा इन अवसरों का लाभ उठाकर विकास के भागीदार बनें। राष्ट्रपति ने कहा, कार्यकुशलता पर भरोसा रखने वाले ही बड़ा सपना देखते हैं। बड़ा लक्ष्य निर्धारित करते हैं।
युवाओं को भी बड़े लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ना होगा। गोल्ड मेडल और पीएचडी डिग्रियां प्राप्त करने वाले मेधावी देश की उज्ज्वल संभावनाएं हैं। सभी को मिलकर बड़े सपने और बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्नत राष्ट्र का निर्माण करना होगा।
समारोह में देश की प्रथम महिला सविता कोविंद, समारोह अध्यक्ष राज्यपाल एवं कुलाधिपति आचार्य देवव्रत, अति विशिष्ट अतिथि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और विशिष्ट अतिथि शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज उपस्थित थे।