केंद्रीय मंत्री को भेजा पत्र, बोले-कारोबार प्रभावित करेगी योजना अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला के टैक्सी ऑपरेटरों ने केंद्र सरकार की उस प्रस्तावित योजना पर गहरी चिंता जताई है, जिसके तहत सवारियों को लाने-ले जाने के लिए निजी सफेद नंबर प्लेट वाले दोपहिया वाहनों को कमर्शियल बाइक टैक्सी के रूप में चलाने की तैयारी है।
टैक्सी कारोबारियों का कहना है कि इससे न केवल शिमला बल्कि पूरे प्रदेश के टैक्सी कारोबार पर संकट खड़ा हो सकता है। राजधानी टैक्सी ऑपरेटर्स वेलफेयर सोसायटी ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर इस योजना को लागू न करने की मांग की है। सोसायटी के अध्यक्ष जितेंद्र ठाकुर और सचिव संदीप कंवर ने मंत्री से योजना पर तत्काल रोक लगाने और प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है। सोसायटी के पदाधिकारियों का कहना है कि इस योजना को लागू करने की घोषणा सुरक्षा कार्यक्रम के पायलट लॉन्च के दौरान की है। उन्होंने कहा कि इससे कमर्शियल टैक्सी ऑपरेटरों को सीधे तौर पर नुकसान होगा। टैक्सी, मैक्सी और ऑटो संचालक कमर्शियल वाहन पंजीकरण शुल्क, रोड टैक्स, यात्री सुरक्षा कर, फिटनेस प्रमाणपत्र शुल्क और कमर्शियल वाहन बीमा समेत कई तरह के शुल्क अदा करते हैं। ऐसे में निजी सफेद नंबर प्लेट वाले वाहनों को समान कमर्शियल कर और अनुपालन के बिना यात्रियों को लाने-ले जाने का काम करने की अनुमति मिलने से उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ सकता है।
सोसायटी का कहना है कि इससे किराये में भी असमानता पैदा होने की संभावना है। सफेद नंबर प्लेट वाले दोपहिया वाहन चालक अपनी मर्जी से किराये में कमी कर प्रतिस्पर्धा पैदा कर सकते हैं। इससे मौजूदा कमर्शियल वाहन संचालकों का कारोबार प्रभावित होगा। साथ ही यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो सकते हैं और सरकार को राजस्व का नुकसान होने की आशंका है। सोसायटी ने केंद्रीय मंत्री से सफेद नंबर प्लेट वाले निजी दोपहिया वाहनों को कमर्शियल बाइक टैक्सी के रूप में चलाने की प्रस्तावित व्यवस्था पर पुनर्विचार कर इसे वापस लेने की मांग की है। इसके अलावा राज्य परिवहन प्राधिकरणों को मौजूदा मोटर वाहन कानूनों के तहत अनधिकृत कमर्शियल संचालन पर कार्रवाई के निर्देश देने और लाइसेंसधारी कमर्शियल परिवहन कामगारों के हितों की रक्षा करने की भी मांग की गई है।