देवभूमि में हिंदी और संस्कृत विषयों को स्नातक तक की पढ़ाई में अनिवार्य विषय बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य उच्च शिक्षा परिषद ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसकी रिपोर्ट 25 जुलाई को हिमाचल सरकार को सौंपी जाएगी।
प्रदेश में फिलहाल छठी से दसवीं कक्षा तक ही संस्कृत को अनिवार्य किया गया है। हाल ही में शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज भी कह चुके हैं कि सरकारी स्कूलों में दूसरी कक्षा से संस्कृत की पढ़ाई अनिवार्य की जाएगी।
शनिवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए सुझाव भेजने को राज्य उच्च शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित दो दिवसीय बैठक का समापन हुआ। बैठक में हिंदी-संस्कृत विषय को अनिवार्य विषय के तौर पर शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया गया।
काउंसिल के चेयरमैन सुनील गुप्ता ने बताया कि दो दिवसीय बैठक के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर विभिन्न तरह के सुझाव आए हैं। सुनील गुप्ता ने बताया कि अधिकांश वक्ताओं ने हिमाचल सहित अन्य पहाड़ी राज्यों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विशेष छूट देने की मांग की।
देश के अन्य राज्यों के मुकाबले पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक स्थिति अलग है। ऐसे में मैदानी क्षेत्रों में लागू होने वाली नीतियां हिमाचल के लिए आसान नहीं रहेंगी। सुनील गुप्ता ने बताया कि सभी सुझावों को रिपोर्ट में शामिल कर प्रदेश सरकार को सौंपा जाएगा।
बैठक में ये आए सुझाव
हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ संस्कृत भाषा को भी प्रार्थना सभा में शामिल किया जाए।
एक दिन हिंदी, एक दिन अंग्रेजी की तर्ज पर एक दिन संस्कृत भाषा का प्रार्थना सभा में हो प्रयोग
टीचर ट्रेनिंग की पढ़ाई में 50 फीसदी सिलेबस संबंधित राज्य का शामिल करने की मांग, टीचिंग यूनिवर्सिटी में भी रिसर्च वर्क करने का सुझाव