पुराने बिजली के मीटरों की राशि उपभोक्ताओं के शेयर में एडजस्ट की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्मार्ट बिजली मीटर लगने के बाद मोबाइल फोन से ही बिल अदा करने का काम हो जाएगा। उपभोक्ताओं को बिल जमा करने के लिए किसी भी काउंटर में नहीं जाना पड़ेगा।
उपभोक्ताओं को अपने घर में कितनी बिजली चाहिए, वह भी मोबाइल पर बता सकेंगे। प्री पेड बिजली मीटर लगाने वाले उपभोक्ताओं को बिजली की बचत से लेकर उपयोग करने की जानकारी भी मोबाइल पर मिलेगी। इसके लिए साफ्टवेयर तैयार किया जाएगा।
ऊर्जा महकमे ने स्मार्ट बिजली मीटर लगाने के लिए केंद्र सरकार से सौ करोड़ के बजट की मांग की थी। केंद्र ने पहले चरण में प्रदेश को 27 करोड़ का बजट स्वीकृत किया है।
केंद्र सरकार ने प्रदेश को सिर्फ स्मार्ट मीटर के पैसे देने का फैसला लिया है। स्मार्ट मीटर के लिए सॉफ्टवेयर विकास के लिए फिलहाल कोई धनराशि नहीं दी गई है। इस राशि का इंतजाम करने के लिए प्रदेश सरकार अब वर्ल्ड बैंक का प्रस्ताव भेजेगी।