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त्रिदेव सम्मलेन में भीड़ देख बौखलाई कांग्रेस: धूमल

Tue, 13 Dec 2016 09:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि त्रिदेव सम्मेलन में भाजपा कार्यकर्ताओं की अपार भीड़ देखकर कांग्रेस घबरा गई है। कांग्रेस नेता बौखलाहट में भ्रामक बयानबाजी पर उतर आए हैं। अगर भाजपा का यह सम्मेलन सफ ल नहीं रहा तो कांग्रेस नेताओं को परेशान होने की क्या आवश्यकता है? 
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वास्तविकता यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंडी में परिवर्तन रैली में उमड़ी जनता की अपार भीड़ और अब सोलन के त्रिदेव सम्मेलन में बूथ स्तर के भाजपा कार्यकर्ताओं की भारी संख्या को देखकर कांग्रेस को अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही है। धूमल ने कहा कि केंद्र पर दोषारोपण करने के बजाए प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह केंद्र सरकार द्वारा दी जा रही आर्थिक सहायता के

दुरुपयोग के आरोपों का सिलेवार ढंग से जवाब दे। आरोपों को सिरे से नकारना प्रदेश सरकार की नाकामी और दुर्भावना को ही प्रदर्शित कर रहा है। लेकिन यह नहीं बता रहे हैं कि केंद्र से 280 करोड़ रुपये मिलने के बाद भी नेशनल हाईवे की डीपीआर तैयार क्यों नहीं की जा रही है और रेलवे के विस्तारीकरण के लिए भू-अधिग्रहण को क्यों लटकाया जा रहा है ? इसी तरह प्रधानमंत्री फ सल बीमा योजना को प्रदेश में लागू करने के लिए अभी तक नोडल एजेंसी का चयन क्यों नहीं हो पाया है ?
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धूमल ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में अब तक मिली केंद्रीय सहायता को लेकर प्रदेश सरकार को श्वेत पत्र जारी करना चाहिए और इससे पहले यूपीए सरकार के दौरान प्रदेश को दी गई केन्द्रीय सहायता के आंकड़े भी जारी करने चाहिए, जिससे दूध का दूध व पानी का पानी हो जाएगा। धूमल ने कहा कि एनडीए सरकार के ढाई वर्षों में प्रदेश को अभूतपूर्व आर्थिक सहायता मिली है।
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शोरगुल के बजाए विपक्ष नोटबंदी पर करता सकारात्मक चर्चा: शांता

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सांसद शांता कुमार ने नोटबंदी को लेकर विपक्ष पर  निशाना साधा है। नोटबंदी पर संसद में चले शोर शराबे पर उन्होंने कहा कि शोरगुल के बजाए नोटबंदी पर विपक्ष चर्चा करता, कोई सकारात्मक सुझाव देता तो कितना अच्छा था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार और काले धन का कलंक मिटाने के लिए ऐतिहासिक और सराहनीय कदम उठाया है। 

शांता ने कहा कि लोग भले ही लाइनों में लगकर इस समय परेशानी महसूस कर रहे हों। लेकिन, वह नोटबंदी का समर्थन कर रहे हैं। इस बार 16 नवंबर से संसद शुरू हुई और 16 दिसंबर तक कोई कार्य किए बिना ही बंद हो रही है।  विपक्ष केवल नोटबंदी पर शोर मचा रहा है। इतने महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक निर्णय पर संसद में चर्चा होनी चाहिए थी। 

लेकिन, विपक्ष ने इस पर कोई सुझाव देने के बजाए संसद को शोरगुल में उलझाए रखा। पूरा देश और युवा पीढ़ी यह तमाशा टीवी पर देखते रहे। संसद चल रही है पर वहां केवल शोर होता है। ऐसे नेताओं का यह व्यवहार लोकतंत्र के माथे पर एक कलंक है। उन्होंने कहा कि नेताओं का आदर करीब समाप्त हो गया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विपक्ष नोटबंदी के मामले पर सार्थक बहस के लिए लोकसभा की कार्यवाही में व्यवधान का रवैया छोड़ेगा।
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