पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने सीएम वीरभद्र सिंह की तुलना प्राचीन भारत के नास्तिक ऋषि चार्वाक से की है। कहा कि मुख्यमंत्री चार्वाक की भांति जब तक जीओ सुख से जीओ, ऋण लेकर घी पीओ की नीति पर विश्वास करते हैं।
चूंकि, चार्वाक का मानना था कि पुनर्जन्म नहीं होता। इसी तरह वीरभद्र सिंह को यह मालूम है कि उनकी सरकार आने वाली नहीं है। इसलिए वे प्रदेश को कर्ज में डुबोने पर तुले हैं।
दिल्ली में सोमवार को होने जा रही राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में रवाना होने से पहले धूमल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार ने प्रदेश को 1 हजार करोड़ दिए, जिसका प्रदेश सरकार कोई उपयोग नहीं कर पाई।
हजारों करोड़ का कर्ज प्रदेश पर चढ़ गया है। अब सरकार 700 करोड़ और कर्ज लेने की तैयारी कर रही है।