हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला सुन्नी में प्री फेब्रिकेटिड तकनीक से अस्पताल का निर्माण किया है। इस तकनीक में नींव के ऊपर ईंट और सीमेंट का प्रयोग नहीं होता है।
करीब आठ माह में पूरे किए आधुनिक प्री फेब्रिकेटिड तकनीक से प्रदेश के पहले दो मंजिला सीएचसी भवन को तैयार कर दिया गया है।
ऐसे में मुख्यमंत्री के चुनाव क्षेत्र शिमला ग्रामीण की सुन्नी और साथ लगती मंडी के करसोग क्षेत्र की जनता को जल्द सौगात देने की तैयारी है।
अस्पताल की लिहाज से भवन में हर सुविधा का ध्यान रखकर बनाया गया है। अब लोकार्पण की तिथि का इंतजार है। भवन पर पांच करोड़ की राशि खर्च हुई है।
भवन आर्कषण का केंद्र बना
लोक निर्माण विभाग ने नई निर्माण तकनीक के साथ ही जरूरत, क्षेत्र के मौसम को देखते हुए स्ट्रक्चरल डिजाइन में आवश्यक बदलाव कर इसे बनवाया है।
तापमान को अनुकूल बनाए रखने जैसी हर जरूरत का इसमें ध्यान रखा गया है। निर्माण में समय समय पर एनआईटी के विशेषज्ञों की मदद ली गई है। यह भवन आर्कषण का केंद्र बना हुआ है। दूर दूर से लोग इसे देखने के लिए पहुंच रहे हैं।
लोक निर्माण विभाग के चीफ चीफ इंजीनियर एमएस ठाकुर और शिमला ग्रामीण डिवीजन के अधिशासी अभियंता आरके श्रीधर ने बताया कि भवन बनकर लोकार्पण के लिए तैयार है।
प्री फेब्रिकेटिड तकनीक से बने भवन को आठ माह में बनाया गया है। 14 दिसंबर 2013 को मुख्यमंत्री ने इसकी आधारशिला रखी, टेंडर सहित अन्य प्रक्रिया को पूरा करने के बाद आठ माह पूर्व इसका निर्माण शुरू किया गया था।
अस्पताल में ये हैं सुविधाएं
सुन्नी में 17000 स्कवेयर फीट में 50 बिस्तरों वाले नवनिर्मित इस अस्पताल भवन में एक ऑपरेशन थियेटर, तीन मेल, फिमेल, चिल्ड्रन वार्ड, लेबर रूम, डाक्टर ड्यूटी रूम, स्टाफ नर्स और ड्यूटी स्टाफ रूम, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे रूम और तीन स्पेशल वार्ड बनाए गए हैं।
क्या है प्री फेब्रिकेटिड तकनीक
इस आधुनिक तकनीक से बिना सीमेंट, सरिया, रोड़ी, रेत के 70 फीसदी फैक्ट्री मेड सामग्री से पूरा भवन बनाया जाता है। इसमें आरसीसी से भवन का बेस तैयारकर स्टील से भवन का स्ट्रक्चर खड़ा होता है।
इसमें आम आरसीसी के भवन की तरह से पिल्लर, बीम, लेंटर न डालकर फैक्ट्री से बने सामान से ही दीवारें खड़ी की जाती है, जो खास तरह की सामग्री इस्तेमाल कर बनी होती हैं। उन दीवारों पर शार्ट कंक्रीटिंग की जाती है, जिससे दीवारें सीमेंट की बनी दीवारों सी ही नजर आती हैं।