आय से अधिक संपत्ति के मामले में हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को गैरकानूनी और राजनीति से प्रेरित बताया है। हाईकोर्ट के समक्ष उन्होंने तर्क रखा कि सीबीआई ने साक्ष्य न होने का तर्क देकर स्वयं इस मामले को बंद कर दिया था, लेकिन सरकार बदलते ही प्राथमिकी दर्ज कर ली।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी के समक्ष प्रतिभा सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन ने तर्क रखा कि इस मामले में कॉमन कॉज संस्था की ओर से दायर याचिका के बाद सीबीआई ने आरंभिक जांच के लिए मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने स्वयं अदालत को बताया था कि ऐसा कोई भी साक्ष्य नहीं है जिससे उनकी मुवक्किल के खिलाफ कोई मामला बनता हो।
लेकिन केंद्र में सरकार बदलने के बाद सीबीआई ने पुन: मामला दर्ज कर जांच शुरू की और प्राथमिकी दर्ज कर ली। स्पष्ट है कि राजनीति से प्रेरित होकर मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने अदालत के समक्ष दायर याचिका में सीबीआई की पेश रिपोर्ट और अदालत के आदेश की प्रतियां पेश की।
उन्होंने कहा कि उनकी मुवक्किल के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई भी मामला नहीं बनता और सीबीआई की कार्रवाई गैरकानूनी है। ऐसे में दर्ज प्राथमिकी को खारिज किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने जब उनकी मुवक्किल के निवास का छापा मारा तो भी कोई भी आपत्तिजनक दस्तावेज व साक्ष्य बरामद नहीं किया जिससे साबित हो कि प्रतिभा सिंह भ्रष्टाचार के मामले में लिप्त हैं। इस मामले में जिरह कल भी जारी रहेगी।