मामा बोले, पुलिस ने पेन ड्राइव और फोन मिलने की बात नहीं बताई, सीबीआई करे जांच
शव मिलने की जगह पर नहीं जाने दिया
एसीएस की जांच रिपोर्ट भी परिवार को नहीं दे रहे
बोले, प्रदेश सरकार पर नहीं विश्वास, न्यायालय से उम्मीद, सीबीआई की जांच से सामने आएगा सच
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। पावर कारपोरेशन के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की मौत के मामले में परिजनों ने प्रदेश सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए हैं। विमल के मामा रिटायर्ड कैप्टन राजेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा की अध्यक्षता में हुई जांच रिपोर्ट को अभी तक परिवार को नहीं सौंप रही है और मजबूरी में उन्हें आरटीआई लगानी पड़ रही है।
उन्होंने कहा कि पुलिस ने जांच के दौरान विमल नेगी से पेन ड्राइव और उनका मोबाइल मिलने के बात को भी छिपाया है। शिमला में पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि उन्हें वीरवार को उच्च न्यायालय में विमल नेगी का मोबाइल मिलने की बात की जानकारी मिली है जबकि पुलिस की ओर से इस बारे में परिवार को कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि शाहतलाई में 18 मार्च को विमल नेगी का शव शाहतलाई में गोबिंद सागर झील से बरामद किया गया लेकिन उन्हें घटनास्थल पर नहीं जाने दिया।
उन्होंने कहा कि सरकार ने 19 मार्च को परिवार को आश्वासन दिया था कि पंद्रह दिन में उच्च स्तरीय जांच की रिपोर्ट सौंपी जाएगी और निष्पक्ष जांच होगी। 8 अप्रैल को रिपोर्ट कमेटी ने मुख्यमंत्री को सौंप दी है लेकिन अभी तक परिजनों को रिपोर्ट नहीं सौंपी जा रही है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं और विमल नेगी को प्रताड़ित करने की बात सामने आई है लेकिन परिवार को रिपोर्ट की कॉपी नहीं दी जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। इसको लेकर अब हम कोर्ट में जाएंगे कि ऐसी क्या बात है कि रिपोर्ट परिवार को नहीं दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि विमल नेगी की पत्नी किरण नेगी को टैक्सी चालक ने बताया था कि जब उसने भराड़ी मोड़ पर विमल नेगी को छोड़ा था तो उन्होंने दो लोगों को उनसे मिलने के लिए आने की बात कही थी। सीसीटीवी फुटेज में वे लोग बस से उतरते हुए दिख रहे हैं लेकिन पुलिस ने इस बारे में कोई जांच नहीं की कि उनकी इस मामले में क्या भूमिका है। 10 मार्च को विमल नेगी आखिरी बार घुमारवीं बस स्टैंड में सीसीटीवी में दिखाई दिए हैं। 18 मार्च को उनका शव मिलता है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि करीब पांच दिन पूर्व उनकी मौत हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि 10 से 13 मार्च के बीच वे कहां रहे और कहां-कहां गए, उसकी कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें पुलिस और सरकार की कार्रवाई पर विश्वास नहीं है। ऐसे में मामले की जांच सीबीआई को सौंपनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस पर सरकार का दबाव है।
मंच देशभर में लड़ेगा लड़ाई : भगत
जनजातीय लोगों की सुरक्षा और सम्मान की लड़ाई के लिए विमल नेगी जनजातीय मंच का गठन किया गया है। यह मंच देशभर में जनजातीय लोगों के हितों और उनकी सुरक्षा के लिए काम करेगा। मंच के कार्यकारी अध्यक्ष भगत सिंंह ने कहा कि जिस तरीके से सरकार का रवैया विमल नेगी की मौत के मामले की छानबीन में सामने आ रहा है वह संदेह के दायरे में है। निष्पक्ष जांच के लिए प्रभावित परिवार और जनजातीय लोगों की तरफ से लगातार सीबीआई जांच की मांग की जा रही है लेकिन सरकार उनकी मांग को अनसुना कर रही है।