भ्रष्टाचार मामले में फंसे पूर्व मुख्य सचिव और प्रदेश चुनाव आयोग के अध्यक्ष पार्थ सारथी मित्रा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वाइस सैंपल देने से मित्रा के लगातार इंकार के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने मित्रा की आवाज के सैंपल सरकारी रिकॉर्ड से हासिल कर लिए हैं। मामले में सैंपल न मिलने से जांच सुस्त हो गई थी, लेकिन रिकॉर्ड मिलने के इस कदम को ब्यूरो की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
ये सैंपल बतौर साक्ष्य पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी के खिलाफ चल रहे कथित गैर कानूनी फोन टैपिंग मामले से जुड़े मामले के थे। ब्यूरो ने कोर्ट के जरिये इन ओरिजिनल टेपों को अब मित्रा के मामले में बतौर साक्ष्य स्थानांतरित करा लिया है। ब्यूरो इन सैंपलों में मौजूद मित्रा की आवाज का अब घूस लेने के मामले के दौरान हुई वायस रिकॉर्डिंग से मिलान कराएगा।
साल 2013 में ब्यूरो ने धारा 118 के तहत जमीन खरीद की मंजूरी देने के नाम पर हुई कथित धांधली के मामले में जांच शुरू की थी। लंबे समय तक जांच ठंडे बस्ते में रही। ब्यूरो ने पिछले साल क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की तो कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। इसके बाद नए सिरे से मामले की जांच शुरू हुई। इसके बाद जयराम सरकार ने मित्रा को आरोपी मानते हुए उनके खिलाफ जांच के लिए विजिलेंस को मंजूरी दे दी।
जांच अधिकारियों ने कई बार मित्रा व मामले से जुड़े कई अन्य पूर्व अधिकारियों, कर्मचारियों व नामजद आरोपियों से पूछताछ की, लेकिन फोन रिकार्डिंग की आवाज को मित्रा की आवाज से मिलाने के मामले में मित्रा का इंकार रोड़ा बन गया। सूत्रों की मानें तो ब्यूरो ने भंडारी मामले में केस प्रॉपर्टी रहे रिकार्डिंग को इस केस में साक्ष्य बना लिया है। अब आवाज का मिलान किया जाएगा। अगर आवाज मित्रा की आवाज से मिल गई तो गिरफ्तारी की तलवार भी लटक सकती है।