देवताओं के देवलुओं के भी रथ मैदान में जाने के लिए पास बनाए गए थे, लेकिन एक बजे के बाद लोगों को मैदान के अंदर भेजकर एक कोने में बैठा दिया गया। धीरे-धीरे मैदान में लोगों की भीड़ लग गई। जैसे ही देवता रथयात्रा के लिए रथ मैदान में आए तो देवताओं के साथ काफी अधिक संख्या में लोग रथ मैदान में पहुंचे। इससे यहां भीड़ लग गई। सुरक्षा के लिहाज से जो तैयारियां की गई थीं, वे काम नहीं आईं। हालांकि, रथ मैदान में मंगलवार को लगाए गए होर्डिंग को बुधवार को हटाकर पीछे कर दिया गया था।