पूर्व मुख्य सचिव पी. मित्रा से जुड़े मामले में पंचकूला के कारोबारी विनोद मित्तल के वॉयस सैंपल और पॉलीग्राफ टेस्ट करवाने के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका को प्रदेश उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। क्या आरोपी को वॉइस सेंपल देने के लिए कानूनन बाध्य किया जा सकता है या नहीं। यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित था। इस कारण प्रदेश हाईकोर्ट ने विनोद मित्तल के वॉयस सैंपल और पॉलीग्राफ टेस्ट लेने के निचली अदालत के आदेशों पर रोक लगा रखी थी।
सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ के पारित फैसले के पश्चात यह स्पष्ट हो गया कि जनहित के दृष्टिगत आरोपी को वॉयस सैंपल और पॉलीग्राफ जैसे टेस्ट के लिए बाध्य किया जा सकता है। हाईकोर्ट के न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने याचिका खारिज करते हुए प्रार्थी को आदेश दिए कि वह जांच अधिकारी के तय स्थान और समय पर वॉइस सैंपल और पॉलीग्राफ टेस्ट देने के लिए हाजिर हो।
भ्रष्टाचार के मामले में तत्कालीन प्रधान सचिव (राजस्व) पी. मित्रा भी आरोपी हैं। करीब 9 साल पुराने इस मामले में विजिलेंस ने केस दर्ज किया है। विजिलेंस के पास आरोपियों के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिगिं है। इसमें पी. मित्रा के अलावा विनोद मित्तल और अन्य व्यक्ति के बीच बातचीत की आशंका जताई गई है। इसकी पुष्टि के लिए वॉयस सैंपल के साथ पॉलीग्राफ टेस्ट करवाया जाना है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 21 मार्च 2011 को आरोपी विनोद मित्तल राजस्व के आला अधिकारियों को प्रभावित करने के लिए 5 लाख रुपये लेकर शिमला आया। उसे पुराने बस अड्डा शिमला में विजिलेंस ने पकड़ लिया था। जांच के दौरान विजिलेंस ने आरोपियों की आपसी बातचीत बारे पुख्ता सबूत इकट्ठे किए और उन्हें साबित करने के लिए आरोपी विनोद मित्तल के वॉयस सैंपल और पॉलीग्राफ टेस्ट की इज्जाजत के लिए निचली अदालत में आवेदन किया था। इसे निचली अदालत ने स्वीकारते हुए विजिलेंस को विनोद मित्तल का वॉयस सैंपल और पॉलीग्राफ टेस्ट लेने की अनुमति दे दी थी।