हिमाचल को वर्ष 2022 तक प्राकृतिक खेती में ढालने के लिए कृषि विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। कृषि विभाग ने सरकारी विक्रय केंद्रों पर कीटनाशक और खरपतवार की दवाइयां न बेचने का फैसला लिया है। कीटनाशक की दवा न बेचने के बारे में कृषि विभाग ने सभी विक्रय केंद्रों को सर्कुलर जारी किया है। इसमें इसी फसल अर्थात अभी से कीटनाशक तथा खरपतवार की दवाई न बेचने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश सरकार ने कृषि विक्रय केंद्रों पर इन दवाइयों का स्टॉक नहीं भेजा है। वहीं, अब किसानों को इन्हीं दवाइयों को खरीदने के लिए प्राइवेट डीलरों के पास लुटने को मजबूर होना पड़ेगा। जानकारी के अनुसार कृषि विभाग अब प्रदेश के किसानों को अपने विक्रय केंद्रों पर किसी भी प्रकार की कीटनाशक तथा खरपतवार दवाइयां मुहैया नहीं करवाएगा।
कृषि विभाग इसका कारण प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना बता रहा है, लेकिन प्रदेश के किसानों को यही दवाइयां निजी दवा विक्रेताओं के पास आसानी से उपलब्ध हो जाएंगी, जहां वह अब किसानों से मनमाफिक दाम वसूलने से गुरेज नहीं करेंगे। कृषि विभाग के उपनिदेशक एनके धीमान ने कहा कि सभी विक्रय केंद्रों में खरपतवार और कीटनाशक की दवाइयां नहीं बेची जाएंगी। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए यह फैसला लिया गया है।