प्रदेश सरकार ने अपने बजट को लोकलुभावन बनाने के लिए आम लोगों से सुझाव मांगे थे। लेकिन लोगों ने बजट के लिए सुझाव देने के बजाय अपने निहित स्वार्थ के हिसाब से सुझाव दिए हैं। दरअसल सरकार ने बार-बार लोगों से अपील की थी कि वह पब्लिक से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय सरकार को भेजें ताकि उचित सुझावों को सरकार अपने बजट में शामिल कर सकें।
वित्त विभाग के सूत्रों की मानें तो बजट बनाने के संबंध में अब तक महज 57 सुझाव सरकार को विभिन्न माध्यम से प्राप्त हुए हैं, जिनमें पांच राजस्व बढ़ाने को लेकर हैं जबकि तीन खर्च प्रबंधन को लेकर। इसके अलावा 41 ऐसे सुझाव हैं जो लोगों की व्यक्तिगत डिमांड अथवा शिकायतें हैं। इनमें से भी कर्मचारियों को रेगुलर करने और वेतन बढ़ाने के सुझाव ज्यादा हैं।
विभागीय सूत्रों की मानें तो प्रदेश के बजट पर वेतन और पेंशन खर्च का सबसे ज्यादा बोझ रहता है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में करीब नौ हजार करोड़ रुपये का खर्च सिर्फ सरकारी कर्मचारियों पर वेतन वितरण में होना है। वहीं, पेंशन को लेकर भी सरकार को करीब 42 सौ करोड़ खर्च करने हैं। ऐसे में अगले साल सामान्य रूप से भी इस मद के खर्च में वृद्धि होनी है।
ऐसे में जो सुझाव अभी तक मिले हैं उनसे खर्च घटने के बजाय और ज्यादा बढ़ जाएंगे। प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त डा. श्रीकांत बाल्दी ने कहा कि लोगों से उम्मीद की जा रही है कि वह बजट बनाने में अपनी भागीदारी निभाएं। साथ ही विभिन्न विभागों व डीसी को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह खुद व स्थानीय उद्योगों, व्यापारिक व किसान संगठनों, सामाजिक व आर्थिक जानकारों से बजट के संबंध में सुझाव लेकर सरकार को भेजें।