ऐतिहासिक फाग मेले में बुधवार को देवी-देवताओं की
शोभायात्रा आकर्षण का केंद्र रही। बुशहर के देवता बसाहरू, रचोली जाख, गसो
के काजल देवता और छोटू देवता ने यात्रा की शुरुआत की।
अपने ठहराव स्थल
चौबच्चा मंदिर से निकलने के बाद चारों देवता पुराने बस अड्डे से बाजार में
उतरे। बाजार की परिक्रमा कर देवता एनएच होते हुए वापस राजमहल परिसर पहुंचे।
इनके बाद सभी देवी-देवता एनएच होते हुए राजमहल परिसर पहुंचे।
बाजार
और फिर एनएच से गुजरते समय शोभायात्रा में देवलुओं ने देवताओं संग ढोल
नगाड़ों की थाप पर जमकर नृत्य किया।
देवलुओं के नृत्य को देखने के लिए जहां
बड़ी संख्या में लोग जुटे, वहीं यात्रा के दौरान पूरा शहर थम सा गया था।
जगह-जगह लोग देव-दर्शन के लिए खड़े थे। इतना ही नहीं, वाहनों में जा रहे
लोगों ने भी शोभायात्रा के दौरान वाहन रोक कर देवताओं के दर्शन किए।
कुल्लू
जिले से आए देवताओं के देवलुओं ने शोभायात्रा में पारंपरिक वेशभूषा के साथ
नृत्य किया, जिससे वे लोगों के आकर्षण के केंद्र बने रहे।
दोपहर
बाद करीब तीन बजे शोभायात्रा समाप्त होने के बाद देवी-देवताओं की पालकियां
महल परिसर में विराजमान हो गई। इसके बाद नाटी का दौर महल परिसर में चला।
देवलु अपने-अपने देवताओं के आगे नाचते रहे। वहीं, दूरदराज से मेला देखने आई
महिलाओं ने भी देवलुओं के साथ नाटी डाली।
वाहन रोके जाएं तो और बेहतर होगी शोभायात्रा
जिला
स्तरीय फाग मेले में देवी-देवताओं की शोभायात्रा के समय वाहनों की आवाजाही
पर कोई रोक नहीं है।
अगर यात्रा अवधि में वाहनों की आवाजाही रोकी जाए, तो
देवलुओं को नाचने के लिए न केवल खुला स्थान मिलेगा, बल्कि शोभायात्रा भी और
बेहतर हो सकती है।
मंडी जिले में शिवरात्रि महोत्सव में जलेब निकलने के
दौरान वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाता है। जलेब संपन्न
होने तक कोई वाहन इधर-उधर नहीं होता।
इस कारण, यहां जलेब का शानदार आयोजन
होता है।