टरबाइन एक से बिजली उत्पादन शुरू किया गया था, इंजीनियरों की योजना बिजली उत्पादन को 32 मेगावाट तक ले जाने की थी। उल्लेखनीय है कि प्रोजेक्ट का काम करीब एक साल पहले पूरा हो गया था। इसके बाद जलभराव व टेस्टिंग शुरू हुई थी। टेस्टिंग के दौरान पेनस्टोक पाइप व जलाशय में रिसाव हुआ था। कई माह तक मरम्मत का काम चला। जलाशय का रिसाव रोकने के लिए सिंगापुर से केमिकल मंगवाया गया। पेनस्टोक पाइप का रिसाव दूर करने के लिए कई माह तक वेल्डिंग का काम चला था।
इंजीनियर के साहस से टला बड़ा हादसा
हादसे के दौरान सब सिग्नल फेल हो चुके थे। ऐसे में इंजीनियर अरुण शर्मा खुद की जान जोखिम में डालकर मोबाइल फोन की रोशनी से पहाड़ी पर चढ़ गए और पेनस्टोक पाइप का व्हील बंद किया। प्रोजेक्ट में इलेक्ट्रिकल विंग के अधीक्षण अभियंता अजय विक्रांत ने कहा कि 15 लोगों ने बड़ी मुश्किल से जान बचाई, अगर व्हील बंद नहीं किया होता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
मौके पर पहुंचे सांसद रामस्वरूप, बोले - खारिज पाइप लगने की होगी जांच
हादसे के बाद सांसद रामस्वरूप शर्मा ने रविवार सुबह परियोजना स्थल का दौरा किया। उन्होंने कहा कि परियोजना के निर्माण में जिन पेनस्टोक पाइपों का इस्तेमाल किया है, उन्हें पहले ही खारिज किया जा चुका था। अधिकारियों व पूर्व सरकार की लापरवाही के कारण खारिज पाइपों को लगाया गया जिससे यह हादसा हुआ है।
परियोजना में विद्युत उत्पादन का जब ट्रायल किया जाना था तो उस समय प्रोजेक्ट के मैनेजिंग डायरेक्टर व अन्य अधिकारी भी नदारद रहे थे। यह एक गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि इस हादसे की जांच करवाई जाएगी। यह हादसा कैसे हुआ, अधिकारियों से इसकी रिपोर्ट मांगी गई है। वहीं, निरीक्षण के लिए व्यास वैली कारपोरेशन के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए हैं।