डीसी कार्यालय परिसर के बाहर किया प्रदर्शन, 13 ब्लॉकों और 18 संगठनों के सदस्यों ने लिया हिस्सा, सरकार पर सौतेले व्यवहार का आरोप
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लंबित चिकित्सा बिलों और पेंशन भुगतान का किया आग्रह
पेंशनर्स की दो टूक, हक दो नहीं उग्र किया जाएगा आंदोलन संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला शिमला संयुक्त पेंशनर्स वेलफेयर समिति की अगुवाई में पेंशनर्स लंबित मांगों को लेकर सड़कों पर उतर गए हैं। उपायुक्त कार्यालय परिसर के बाहर शुक्रवार को सीटीओ चौक से शेरे पंजाब तक निकाली रैली में जिले के 13 ब्लॉकों और 18 संगठनों के सदस्यों ने हिस्सा लिया।
पेंशनर्स ने सरकार पर 2016 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार करने, पेंशन और चिकित्सा बिलों में देरी करने का आरोप लगाया। उन्होंने ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) लागू करने और वित्तीय लाभ तुरंत देने का आग्रह भी किया। पेंशनर्स नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने एक हफ्ते में मांगों को पूरा नहीं किया तो प्रदेशभर में विधायकों का घेराव किया जाएगा। साथ ही आगामी चुनावों में उन्हें गांवों में आने से रोका जाएगा। धरने की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष भागचंद चौहान ने की। उन्होंने कहा कि हिमाचल के इतिहास में यह पहला अवसर है जब प्रदेशभर के पेंशनर्स अपनी लंबित मांगों को लेकर एकजुट हुए हैं। नेताओं ने कहा कि पेंशन, ग्रैच्युटी, लीव एनकैशमेंट और चिकित्सा बिलों के भुगतान में देरी की जा रही है। इस दौरान पेंशनरों ने तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, जिसमें डीए चोर गद्दी छोड़ जैसे नारे शामिल थे।
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पेंशनरों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र भेजकर अपने आक्रोश से अवगत करवाएंगे। उन्होंने कहा कि अब धैर्य की सीमा समाप्त हो चुकी है, यदि सरकार ने पेंशनर्स के हक में निर्णय नहीं लिया तो यह सरकार नहीं चलेगी। संयुक्त संघर्ष समिति के अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा ने बताया कि 15 सितंबर को मुख्यमंत्री को सौंपे गए 16 सूत्रीय मांग पत्र पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, इसी के विरोध में यह रैली निकाली गई। रैली के बाद पेंशनर्स प्रतिनिधिमंडल ने एडीसी को ज्ञापन सौंपा और संयुक्त सलाहकार समिति की बैठक कर लंबित मांगों पर चर्चा करने का आग्रह किया।
खुद की सैलरी बढ़ाई, पेंशनरों को 9 सालों से नहीं मिले पैसे
टुटू खंड के प्रधान मस्त राम ने कहा कि पेंशनर किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त हैं। मंत्री और विधायकों की सैलरी रातों रात बढ़ गई लेकिन सरकारों ने 9 सालों से उनके वित्तीय लाभों का भुगतान करने के लिए कुछ नहीं किया। रामपुर सिटी अध्यक्ष अमोलक राम ने कहा कि सरकार ने पेंशनर्स के देयकों पर कुंडली मार रखी है। उन्होंने सरकार पर कुंभकर्ण की नींद सोने का आरोप लगाया। नेरवा इकाई के अध्यक्ष सोहन कल्याण ने चिकित्सा बिलों के बकाया भुगतान पर सवाल उठाते हुए कहा कि जीवन का अंतिम पड़ाव में वित्तीय लाभों को रोकना दुर्भाग्यपूर्ण है। सेवानिवृत्त कर्मचारी नेता ओपी चौहान ने कहा कि अब राज्यपाल से वित्तीय लाभों को पूरा करने की मांग उठाई जाएगी।
हाथों में कंपन, लेकिन आवाज बुलंद
पेंशनर नेता ऋतु राज शर्मा, गीतू राम, दीपन ठाकुर, दौलत चौहान, बृज लाल ठाकुर, सुख देव मट्टू, बुद्धि राम, मोहन ठाकुर, गंगा राम शर्मा, लायक राम शर्मा और मीरा ठाकुर ने कहा कि जिन लोगों को घर में आराम करना था, आज वह हाथ में लाठी और कानों में ईयर फोन लगाए सड़कों पर खड़े होकर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। रोकना महंगाई को था, रोक बैठे पेंशनरों के डीए-एरियर-चिकित्सा बिल। शिमला शहरी इकाई के महासचिव सुभाष वर्मा ने सचेत किया कि 1971 और 1980 की हड़ताल की पुनरावृत्ति न होने दें। सेवानिवृत्त कर्मचारी नेता ओपी चौहान ने कहा कि हर घर के बुजुर्ग सड़कों पर उतरे हैं। अब राज्यपाल से वित्तीय लाभों को पूरा करने की मांग उठाई जाएगी।