शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। आलम यह है कि मरीज जिस डॉक्टर से उपचार करवा रहे हैं वह नहीं मिल रहे। कई मरीज तो बिना उपचार करवाए लौट रहे हैं। इसके अलावा कई ऐसे मरीज भी हैं जोकि अब डॉक्टरों को फोन करके उनके वापस आने की जानकारी फोन पर ले रहे हैं।
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आईजीएमसी शिमला और डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज (टांडा) से 52 डॉक्टरों को हमीरपुर, नाहन तथा चंबा मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। इन मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस प्रशिक्षु छात्र-छात्राओं की परीक्षाएं होनी थीं ऐसे में वैकल्पिक तौर पर वरिष्ठ डॉक्टरों को यहां भेजा था। इसमें 23 डाॅक्टर आईजीएमसी के हैं। अब जबकि यह परीक्षाएं हो चुकी हैं तो ऐसे में अब सरकार को डॉक्टरों को वापस बुला लेना चाहिए था। आईजीएमसी सेमडिकोट के अध्यक्ष डॉ. राजेश सूद और महासचिव डॉ. जीके वर्मा ने बताया कि सरकार ने जिस कार्य के लिए डॉक्टरों को भेजा था वह अब पूरा हो गया है। ऐसे में डॉक्टरों को तुरंत प्रभाव से वापस बुला लेना चाहिए।