गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को उपचार के लिए बाहरी राज्य में जाने में मुश्किल हो रही है। कई मरीजों को पीजीआई समेत अन्य निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में कीमोथैरेपी या किडनी ट्रांसप्लांट के लिए पहुंचना मुश्किल हो गया है। चिकित्सा परामर्श या दवाई न मिलने पर मृत्यु का भय उन्हें सता रहा है।
क्षेत्र के रमेश चंद का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है। इन्हें नियमित दवाई का सेवन करना पड़ता है। दवाई खत्म हो चुकी है। कर्फ्यू के दौरान वह चंडीगढ़ से अपने दवाई कैसे लाएं? गाड़ी की सुविधा भी नहीं है। एचआरटीसी बसों में इन्हें निशुल्क बस पास की सुविधा है। उनके साथ एक अटेंडेंट भी जा सकता है। अब समस्या यह है कि वह कैसे दवाई लाएं व इलाज करवाएं।
सूरम चंद डेराबस्सी में एक निजी अस्पताल के आईसीयू में हैं। इनकी देखभाल के लिए रिश्तेदार को वहां जाना है, लेकिन कोई सुविधा नहीं मिल रही है। कोटला गांव में पत्नी के साथ रह रहे हरवंश दत्त ने बताया कि उनकी पत्नी का पंचकूला के एक अस्पताल में ऑपरेशन हुआ है। विशेष इंजेक्शन लगाने के लिए पंचकूला ले जाना है। बिझड़ी की कांता को हमीरपुर रेफर किया गया है।
इन्होंने कहा कि यदि उन्हें अपने जीवन रक्षक दवाई ही नहीं मिलेगी तो वह कोरोना से कैसे लड़ पाएंगे। प्रशासन से इन लोगों ने आग्रह किया कि बाहरी राज्यों के लिए ऐसी दवाई लाने या जाने की सुविधा दी जाए। संकट की घड़ी में ऐसे लोगों को मदद की दरकार है। उधर, एसडीएम प्रदीप कुमार ने बताया कि अगर इन लोगों को कर्फ्यू पास की जरूरत है तो इनके पास बना दिए जाएंगे।