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Shimla News: डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज बेहाल न बड़े ऑपरेशन हुए न मिला उपचार

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डीडीयू में ओपीडी पूरी तरह ठप, आईजीएमसी में चिकित्सा शिक्षकों ने संभाली ओपीडी, हर रोज टल रहे हैं 40 ऑपरेशन
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आईजीएमसी में कम पहुंचे मरीज, डीडीयू में पहुंचे थे सौ मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में शनिवार सुबह साढ़े नौ बजे रेजिडेंट डॉक्टर और मेडिकल ऑफिसर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। इस कारण अस्पताल में ओपीडी सेवाएं प्रभावित रहीं और मरीज उपचार के लिए यहां वहां भटकते रहे। जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में भी स्वास्थ्य सेवाएं ठप रहीं।

ओपीडी न चलने से मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है और कई ऑपरेशन भी नहीं हुए। आईजीएमसी में सिर्फ जरूरी ऑपरेशन ही हुए। अस्पताल में आम दिनों में 50 के करीब ऑपरेशन होते हैं लेकिन अब आठ से दस सर्जरी ही हो रही हैं। इस आधार पर हर रोज करीब 40 ऑपरेशन टल रहे हैं, अब आने वाले दिनों में मरीजों को दी गई ऑपरेशन की तिथियों में भी बदलाव होना तय माना जा रहा है। रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (आरडीए) मारपीट मामले में बर्खास्त किए डॉक्टर की सेवाएं बहाल करने की मांग कर रही है। सुबह से ही रेजिडेंट डॉक्टर और मेडिकल ऑफिसर ने अस्पताल में नियमित सेवाएं नहीं दीं। हालांकि आपातकालीन विभाग और वार्ड में भर्ती मरीजों को नियमित उपचार मिला।
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अस्पतालों में चिकित्सकों की हड़ताल की पूर्व सूचना के चलते शनिवार को मरीजों की संख्या बहुत कम रही। दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) क्षेत्रीय अस्पताल शिमला में सुबह साढ़े नौ बजे से कुछ मरीज जानकारी के अभाव में ओपीडी में उपचार करवाने के लिए पहुंच गए थे। यहां आकर उन्हें ओपीडी न होने की सूचना मिली तो बिना उपचार करवाए लौट गए। मरीजों अस्पताल के पर्ची काउंटर में पूरे दिन में करीब सौ ऐसे मरीज पर्ची बनवाने के लिए पहुंचे थे। अस्पताल में उपचार करवाने के लिए मुख्य गेट पर बैठे टांग पर प्लास्टर लगे पाहल के मरीज सुरेंद्र ने बताया कि आज उनका प्लास्टर कटना था, सुबह से यहां इंतजार कर रहा हूं। अब प्लास्टर कटवाने को तो कह दिया है, लेकिन एक्सरे और उसकी रिपोर्ट सही आई या नहीं यह कैसे पता चलेगा, ओपीडी में डॉक्टर नहीं हैं।

अब पता चला नहीं
डीडीयू अस्पताल में बेटी को स्त्री रोग विभाग में दिखाना था और टेस्ट होने थे। यहां आकर पता चला कि डॉक्टर ओपीडी में नहीं बैठेंगे। अब वापस घर जाने के अलावा कोई चारा शेष नहीं है।
-रीना ठाकुर, निवासी कुफटाधार


घुटनों में है दर्द, नहीं मिले डॉक्टर
घुटनों में दर्द है, डॉक्टरों को दिखाने के लिए अस्पताल आई थी। अब ओपीडी में डॉक्टर नहीं बैठे है, तो दोबारा अस्पताल आना पड़ेगा, पता नहीं यह हड़ताल कब तक चलेगी।
-सोमा देवी, निवासी आनी


आंखों के लिए नहीं मिला उपचार
यहां आकर पता चला डॉक्टर हड़ताल पर हैं। वह कोटखाई से आखों का उपचार करवाने के लिए आई थीं। हड़ताल के कारण उपचार नहीं हो पाया है।
-पिपना, निवासी कोटखाई

प्रोफेसर ने ओपीडी में किया चेकअप
शिमला। आईजीएमसी में सीनियर और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से शनिवार को अस्पताल में फैकल्टी सदस्य और शिक्षक चिकित्सकों ने ओपीडी संभाली। हालांकि अस्पताल में चिकित्सकों की हड़ताल पर जाने की सूचना मिलने के कारण ओपीडी में बहुत कम संख्या में मरीज आए। आपातकालीन विभाग में रेजिडेंट डॉक्टरों और अन्य चिकित्सकों ने मरीजों का उपचार जारी रखा। इससे इमरजेंसी में आए मरीजों को उपचार मिलता रहा। सबसे अधिक मरीज ऑर्थोपेडिक्स और मेडिसिन विभाग में मरीज उपचार करवाने के लिए पहुंचे थे। बाल रोग विभाग में भी कुछ मरीज डॉक्टरों के इंतजार में बैठे रहे। करसोग से ऑपरेशन से पूर्व टेस्ट करवाने के लिए आई बुजुर्ग महिला कली देवी और उनके बेटे रोशन ने बताया कि सुबह चिकित्सक उन्हें देख कर गए हैं। अब टेस्ट की रिपोर्ट दिखाने को चिकित्सक का इंतजार कर रहे हैं। ऑर्थोपेडिक्स विभाग में प्लास्टर निकलवाने आई बच्ची प्रांजल ने बताया कि मेरा प्लास्टर डॉक्टरों ने हटा दिया।
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आईजीएमसी में खींचने फोटो
और वीडियो बनाने पर रोक
शिमला। आईजीएमसी में हड़ताल के शुरू होने के बाद मरीजों की परेशानी और असर की रिपोर्टिंग करने आने वाले मीडिया कर्मियों पर फोटो खींचने तथा वीडियो बनाने पर अस्पताल प्रबंधन ने रोक लगा दी है। इसके लिए पहले एमएस से अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया है। इस कारण शनिवार को रिपोर्टिंग करने आए मीडिया के कर्मियों और आम लोगों को सुरक्षा कर्मियों ने वीडियो बनाने तथा फोटो खींचने से रोकने का प्रयास किया। इसको लेकर सुरक्षा कर्मी और अस्पताल स्टाफ के साथ बहसबाजी होती रही।
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