शिमला। प्रदेश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) में हो रहे नवाचारों को कानूनी संरक्षण देने के लिए उद्यमियों को बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) के प्रति जागरूक किया जाएगा। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के आईपीएफसी बौद्धिक संपदा सुविधा केंद्र शिमला की संचालन समिति की मंगलवार हुई बैठक में यह फैसला लिया। बैठक में एमएसएमई को बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य पेटेंट, ट्रेडमार्क और कॉपीराइट से जुड़ी सुविधाओं तथा सरकारी योजनाओं का लाभ उद्यमियों तक पहुंचाना था। बैठक की अध्यक्षता एमएसएमई विकास कार्यालय के सहायक निदेशक अशोक कुमार गौतम ने की। उन्होंने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र के कई उद्यमियों के पास नए उत्पाद और नवाचार हैं, लेकिन आईपीआर की जानकारी न होने के कारण वे इन्हें कानूनी संरक्षण नहीं दे पाते। ऐसे उद्यमियों तक पहुंच बनाना और उन्हें पेटेंट, ट्रेडमार्क व कॉपीराइट के महत्व से अवगत कराना आवश्यक है। इस मौके पर पीएचडीसीसीआई हिमाचल प्रदेश के निदेशक अनिल कुमार सौंकला, सहायक निदेशक पार्थ अशोक और पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर किरण मौजूद रहे। संवाद