भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में आयोजित संगोष्ठी में साहित्यकारों ने व्यक्त किए विचार
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हैदराबाद रियासत के विलय और कश्मीर पर भी हुई चर्चा संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (एडवांस्ड स्टडी) में सरदार पटेल की दृष्टि पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन शनिवार को राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर चर्चा हुई। देश-विदेश के इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने इसमें भाग लिया।
दिनभर सात तकनीकी सत्रों में हैदराबाद के विलय, अखिल भारतीय सेवाओं की स्थापना और विभिन्न रियासतों के एकीकरण जैसे विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए। पहले सत्र में बुल्गारिया के सोफिया विश्वविद्यालय के कुंदन सिंह ने अरविंद और सरदार पटेल के विचारों पर प्रकाश डाला। अमेरिका के शॉनी स्टेट यूनिवर्सिटी की लावण्या वेमसानी ने हैदराबाद रियासत के भारत में विलय की प्रक्रिया का विश्लेषण किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के संतोष कुमार राय ने भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था के निर्माण में सरदार पटेल की भूमिका पर बात की। उन्होंने अखिल भारतीय सेवाओं की स्थापना को स्वतंत्र भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के क्रिस्टो डॉस ने सरदार पटेल को आधुनिक भारत का निर्माता कहा। गीता धर्मपाल ने गांधीवादी दृष्टिकोण और राष्ट्रीय एकीकरण के बीच संबंधों पर विचार रखे। आईआईएएस के फेलो मुक्तिकांत मोहंती ने ओडिशा की रियासतों के एकीकरण की रणनीति पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। बृजेंद्र पांडेय ने विभाजन के बाद के संक्रमणकाल में सरदार पटेल के नेतृत्व का विश्लेषण किया। अवकाश जाधव ने इटली के राष्ट्रवादी विचारक मैजिनी के प्रभाव में पटेल के नेतृत्व की व्याख्या की। दोपहर के सत्र में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अंकुश भारद्वाज ने कश्मीर प्रश्न पर नेहरू और पटेल के दृष्टिकोण का पुनर्मूल्यांकन प्रस्तुत किया। राजेश कुमार चौहान ने केएम मुंशी और सरदार पटेल के ऐतिहासिक चिंतन पर शोधपत्र पढ़ा। पूर्व टैगोर फेलो ओम प्रकाश शर्मा ने पंजाब की पहाड़ी रियासतों के भारत में एकीकरण में सरदार पटेल की भूमिका पर चर्चा की। अंतिम सत्र में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, राष्ट्रीय स्मृति और सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण को भी सरदार पटेल की राष्ट्र निर्माण की दृष्टि से जोड़ा गया। संगोष्ठी का समापन रविवार को ऑनलाइन सत्रों और समापन समारोह के साथ होगा।