साहसिक खेल पैराग्लाइडिंग के लिए स्वर्ग कही जाने वाली विश्व प्रसिद्ध बीड़ बिलिंग घाटी में उड़ानों का सिलसिला चरम सीमा पर है। चुनावी शोरगुल से बेखबर विदेशी पायलट रोजाना घाटी में उड़ानों का आनंद ले रहे हैं।
रुस, यूके, आस्ट्रिया, आस्ट्रेलिया, उक्रेन, हालैंड, उजबेकिस्तान सहित करीब एक दर्जन देशों के करीब 160 पायलट घाटी में एक सप्ताह से डेरा डाले हुए हैं और रोजाना उड़ानें भर रहे हैं।
विदेशी पायलटों के घाटी में दस्तक देने पर बीड़ बिलिंग घाटी के पर्यटन व्यवसाय पर अनुकूल असर पड़ा है। रोजाना सैकड़ों लोग घाटी में उड़ानों का आनंद लेने के लिए आ रहे हैं।
विदेशी पायलटों का जमावड़ा नवंबर माह के अंत तक रहने की उम्मीद है। घाटी में उड़ान भरने के लिए पायलटों को स्थानीय प्रशासन से 500 रुपये एक सप्ताह के हिसाब से फीस चुकानी पड़ती है और दस्तावेजों के सही होने पर ही वह उड़ान भर सकता है।
इन पायलटों के लिए एसोसिएशन के तत्वावधान में बचाव दल तैनात रहता है। उधर, एसडीएम बैजनाथ डॉ. मुरारी ने बताया कि दस्तावेजों की जांच के बाद ही पायलटों को उड़ान की अनुमति दी जा रही है।
चुनाव के कारण बड़ी प्रतियोगिता नहीं हुई
चुनावी सीजन मानवीय परिंदों के साहसिक खेल के सीजन पर भारी पड़ा है। पिछले तीन चार सालों से घाटी में अक्तूबर नवंबर माह में बड़ी प्रतियोगिता होती आई है।
इस मर्तबा चुनावी सीजन के चलते पैराग्लाइडिंग की बड़ी प्रतियोगिता का आयोजन संभव नहीं हो पाया है। बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन भारतीय वायु सेना के सहयोग से मात्र एक दिवसीय प्रतियोगिता का ही आयोजन करवा सकी है।