विधानसभा में शनिवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव सैजल ने कहा कि प्रदेश सरकार एनओसी के बाद पपरोला आयुर्वेदिक पीजी कॉलेज को अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान बनाएगी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर केंद्र सरकार से यह मामला उठाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने प्रदेश में तीन साल में 1500 डॉक्टरों की नियुक्ति की, जबकि पूर्व सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों की कमी रहती थी। मंत्री के जवाब देने के बाद विपक्ष के सदस्यों की ओर से स्वास्थ्य विभाग को लेकर लाया कटौती प्रस्ताव सदन में अस्वीकार कर दिया गया।
कांग्रेस विधायक सुंदर ठाकुर ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि कुल्लू अस्पताल को नेरचौक मेडिकल कॉलेज से जोड़ा जाए। कुल्लू अस्पताल में डॉक्टरों की कमी को दूर नहीं किया तो आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। विधायक लखविंद्र राणा ने कहा कि उनके क्षेत्र में भी डॉक्टरों की कमी है। नालागढ़ में ईसीएच अस्पताल खोला जाए। विधायक विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि कोरोना काल में बनाए गए कोविड सेंटरों में डॉक्टरों की कमी रही। आईजीएमसी अस्पताल शिमला में ओपीडी का नया भवन इस्तेमाल नहीं हो रहा।
विधानसभा की डिस्पेंसरी में लैब शुरू करके जांच की सुविधा दी जाए। माकपा विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि अस्पतालों में लाखों की मशीनों की मरम्मत पर करोड़ों व्यय किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के लिए बनी सामान खरीद नीति की जांच की जाए। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कोविड-19 के प्रदेश में कुल 60,379 मामले सामने आए हैं और इनमें से 58,248 ठीक हुए। पड़ोसी राज्यों से कम मौतें यहां हुई हैं। डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और एनजीओ ने अच्छा काम किया है। प्रदेश सरकार ने 6 नवंबर, 2019 को आयुर्वेद नीति अधिसूचित की है। इससे पहले ऐसा नीतिगत दस्तावेज नहीं था। प्रदेश के बीस अस्पतालों में पंचकर्मा सुविधा उपलब्ध है।