प्राकृतिक खेती से खाद, केमिकल स्प्रे व दवाइयां खरीदने के भी पैसे बचते हैं। केवल किसान के पास देसी नस्ल की गाय होनी चाहिए, जिससे वे खाद व देसी कीट नाशक बना सकता है। इनके इस्तेमाल से प्रकृति भी स्वच्छ रहती है। दूसरा इस पद्धति में क्यारियां, मेढ़ें बनाकर मिश्रित खेती की जाती है, जिससे किसानों की आय दोगुनी करने में भी यह बहुत कारगर है। इसमें बीज कम लगता है जबकि उत्पादकता ज्यादा है।
सरकार दे रही यह सहायता
- देसी गाय खरीदने के लिए 25 हजार रुपये की सहायता
- किसानों को निशुल्क प्रशिक्षण
- 250 लीटर के ड्रम लेने पर लागत पर 75 प्रतिशत सब्सिडी
- पशुशाला में फर्श डालने, गोबर के चैंबर के लिए आठ हजार
- संसाधन भंडार पर 10 हजार रुपये के अनुदान का प्रावधान है
जिले के तीन हजार किसानों ने अपनाई शून्य लागत प्राकृतिक खेती
जिला उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर का कहना है कि मंडी जिले में शून्य लागत प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। इस साल जिले के 3 हजार किसानों ने शून्य लागत प्राकृतिक खेती अपनाई है। जहर मुक्त खेती से भयंकर बीमारियों से बचा जा सकता है। साथ ही लागत शून्य होने के चलते किसानों के खर्चों की बचत, मिश्रित खेती तथा अच्छी पैदावार से उनकी आमदनी दोगुनी करने में भी यह सहायक है।