इसके साथ ही जिला परिषद में पहले कोरम के लिए पहले सदस्यों की आधी उपस्थित जरूरी थी लेकिन अब इसे वन थर्ड उपस्थित अनिवार्य किया गया है। कोरम पूरा न होने के कारण योजनाएं स्वीकृति नहीं हो पाती थी। ऐसे में यह प्रावधान किए गए हैं। बुधवार को विधानसभा के पटल में यह विधेयक रखा गया है। वीरवार को इसे सर्वसम्मति से मंजूरी मिलेगी। प्रावधानों के अनुसार सरकारी या पंचायत भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले लोग भी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
वित्तीय अनुशासन को ध्यान में रखते हुए सहकारी बैंकों और सोसाइटियों के डिफाल्टरों को भी चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया गया है। साथ ही, जिन लोगों पर पंचायत के ऑडिट में रिकवरी लंबित है, वे भी चुनावी प्रक्रिया से बाहर रहेंगे। यह कदम पंचायतों में वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।सरकार का कहना है कि इन सख्त नियमों का उद्देश्य साफ-सुथरी छवि वाले और ईमानदार प्रतिनिधियों को पंचायतों में लाना है, ताकि ग्रामीण विकास योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो सके। इस निर्णय से चुनावी मैदान में साफ छवि वाले उम्मीदवारों को बढ़ावा मिलेगा और पंचायत स्तर पर सुशासन को मजबूती मिलेगी।