हिमाचल में पंचायत चुनावों पर खराब मौसम ने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। रोस्टर जारी होने के बावजूद कई जिलों में चुनाव करवाने पर असमंजस पैदा हो गई है। बर्फबारी की संभावना को देखते हुए प्रशासन भी परेशानी में आ गया है। सवाल उठ रहे हैं कि अब इन क्षेत्रों में चुनाव कैसे पूरे करवाए जाएंगे। पंचायती चुनाव के रोस्टर ने ठंडे किन्नौर जिले को गरमा दिया है।
जिले के तीनों खंडों कल्पा, निचार और पूह के राजनीतिक दल कांग्रेस और भाजपा चुनावी रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। ज्ञात रहे कि किन्नौर जिले के 65 पंचायतों के प्रधानों, उप प्रधानों, जिला परिषद और तीनों खंडों में बीडीसी के चुनावों के लिए रोस्टर जारी हुआ है। लेकिन पंचायती राज चुनाव मतदान की तिथियां तय न होने से लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
बर्फबारी के बीच मतदान केंद्रों पर पहुंचना मुश्किल
किन्नौर जिले के अधिकांश क्षेत्र स्नो बाउंड हैं। ऐसे में अगर सरकार मतदान की तिथियां निर्धारित करने में और देरी करेगी, तो मौसम बिगड़ने से बर्फबारी हो सकती है। इसके कारण चुनाव में बाधा पड़ सकती है। बर्फबारी के कारण जिले के सुमरा, शलखर, हांगो, चांगो, टाशीगांग, नाको, लियो, ठंगी, लंबर, कुन्नोचारंग, छितकुल, लिप्पा, आसरंग, नेसंग, रोपावैली, सांगला वैली, भावावैली निचार, तरांडा, रूपी, छोटाकंबा, गरशु, पानवी रामनी, जानी, पुनंग, युला, मीरू सहित कई अन्य क्षेत्रों में मतदान नहीं हो सकेगा।
भाजपा युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष हाकीम नेगी ने कहा कि युवा मोर्चा ने पंचायती राज चुनावों के लिए पूरी तरह से कमर कस ली है। किसान मोर्चा प्रदेश सचिव महेश्वर सिंह नेगी ने कहा कि सरकार व जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते रोस्टर जारी होने के बाद भी मतदान की तिथियां निर्धारित नहीं हो सकी हैं। इसके अलावा डीपीओ का पद नहीं भरा जा रहा।
जिले के कई जगहों पर तहसीलदारों की स्थायी नियुक्ति भी नहीं हुई हैं। एसडीएम कल्पा डॉ. विशाल शर्मा ने कहा कि जिले में डीएओ का पद स्वीकृत हो चुका है। डीएफओ करीब दो दिन में पदभार ग्रहण कर लेगा। उन्होंने कहा कि मतदान की तिथि निर्धारित करने को लेकर वह कुछ नहीं कह सकते। सरकार के आदेश मिलने के बाद मतदान मतदान करवाया जाएगा। इसके अलावा बाकी जिलों में भी मौसम चुनाव में खलनायक बन सकता है।