फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिमाचल में नहीं रुक रही ओवरलोडिंग, ठूंस-ठूंस कर भरी जा रहीं सवारियां

Tue, 10 Apr 2018 12:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन

हिमाचल में बड़े हादसों के बाद भी परिवहन निगम के वाहनों समेत निजी बसों और स्कूल टैक्सियों में ओवरलोडिंग नहीं रुक रही है। परिवहन विभाग की ओर से ओवरलोडिंग को रोकने के आदेश पारित होते हैं लेकिन, जमीनी स्तर पर उन पर अमल नहीं होता। 

विज्ञापन


स्कूलों की बसों और टैक्सियों के भी यह हाल हैं। छात्रों को ठूंस-ठूंस कर भरा जाता है। सरकारी अमला न तो बसों की चेकिंग करता है और न ही टैक्सी मालिकों के खिलाफ कार्रवाई होती है। 

सरेआम कानून का उल्लंघन होता है। शहरों में निजी स्कूलों के पास लोगों को जाम से निजात नहीं मिल रही है। प्रशासन ने निर्णय लिया था कि जाम से निजात दिलाने के लिए स्कूल बस स्टॉपेज पर पुलिस तैनात रहेगी। लेकिन आलम ढाक के वही तीन बात जैसा है।

विज्ञापन

पुलिस आज से चलाएगी अभियान

सरकार ने फैसला लिया था कि निजी चालकों को भी परिवहन निगम प्रशिक्षण देगा। लेकिन निगम की यह योजना भी खटाई में पड़ गई है।बसों में चालकों के मोबाइल सुनने और स्टीरियो बजाने पर अंकुश नहीं लग रहा है।

निजी चालक गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन सुनते या फिर ऊंची आवाज में स्टीरियो पर गाने बजाते दिखाई देते हैं। कांगड़ा जिले के नूरपुर के समीप मलकवाल में हुई स्कूल बस दुर्घटना के बाद पुलिस एक्शन मोड में आ गई है।

डीजीपी सीताराम मरडी ने सभी पुलिस कप्तानों को निर्देश दिए हैं कि वह मंगलवार से स्कूली वाहनों की चेकिंग करेंगे। अभियान के दौरान वाहनों के फिटनेस संबंधी कागजों के अलावा चालकों के लाइसेंस चेक किए जाएंगे।

साथ ही सभी चालकों को बारिश के मौसम में वाहन चलाने के दौरान एहतियात बरतने के लिए एडवाइजरी दी जाएगी। हिमाचल पुलिस के प्रवक्ता डॉ. खुशहाल शर्मा ने बताया कि इस अभियान के अलावा तेज रफ्तार में चलने वाले स्कूल वाहनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

पहाड़ों पर 20 किमी है रफ्तार सीमा
परिवहन विभाग की ओर से बसों की स्पीड तय की गई है। प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में 20 किलोमीटर प्रतिघंटा जबकि मैदानी इलाकों में 40 किलोमीटर प्रति घंटा के हिसाब से बस चलाई जा सकती है। स्कूल बसों का रंग पीला तय किया है। बाकायदा बसों में सवारियों के बैठने की व्यवस्था के हिसाब से अनुमति दी जाती है।

तंग सड़कें भी बन रहीं हादसों का कारण

हिमाचल की तंग सड़कें भी हादसों का कारण बन रहीं हैं। प्रदेश सरकार ने हिमाचल में 300 के करीब ब्लैक स्पॉट चयनित किए हैं लेकिन उनको दुरुस्त नहीं किया जा रहा है।

हादसों को रोकने के लिए सरकार ने स्पीड ब्रेकर, सड़कों के किनारे क्रैश बैरियर लगाने का फैसला लिया था लेकिन यह क्रैश बैरियर सिर्फ नेशनल हाइवे में लगे हैं। जिले की सड़कों और राज्य मार्गों में क्रैश बैरियर नहीं लगाए गए।

रोड सेफ्टी के तहत नेशनल हाइवे के किनारे ट्रॉमा सेंटर बनाए जाने थे। यह इसलिए लोगों को मौके पर प्राथमिक उपचार मिल सके। लेकिन सरकार की यह योजना भी धरातल पर नहीं उतर पाई।
विज्ञापन

हिमाचल में हुए बड़े बस हादसे

20 अप्रैल, 2017 - यात्रियों से भरी उत्तराखंड की ओवरलोड निजी बस शिमला के गुम्मा के निकट खाई में गिरी, 45 की मौत
5 नवंबर, 2016 - मंडी के बिंद्रावणी में ब्यास में गिरी बस, 17 की मौत, 26 घायल
20 मई, 2016 - चंबा में बस हादसा, 14 मरे, 31 घायल
23 जुलाई, 2015 - कुल्लू में पार्वती नदी में गिरी बस, 31 लोग बहे
21 अगस्त, 2014 - किन्नौर के रुतरंग में बास्पा नदी में बस गिरी, 23 की मौत, 20 घायल
27 सितंबर, 2013 - रेणुका में ददाहू टिक्कर संपर्क मार्ग पर निजी बस गहरी खाई में गिरी। बस सवार सभी 21 लोगों की मौत
8 मई, 2013 - मंडी के झीड़ी में जोगणी माता मंदिर के पास ब्यास नदी में समाई बस, 40 मरे
11 अगस्त, 2012 - चंबा धुलाड़ा मार्ग पर गागला के पास बस हादसा, 52 मरे 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें