देश-विदेश से रोहतांग आने वाले सैलानियों से मढ़ी में जमकर लूट-खसोट हो रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर जिला प्रशासन ने रोहतांग और सोलंगनाला से तमाम व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगा दी है। दुकानों और ढाबों को हटाया जा चुका है। मौके का फायदा उठाकर मढ़ी में अब मनमानी वसूली हो रही है। हद तो तब हो रही है जब 15 रुपये में मिलने वाला आलू का एक परांठा यहां 35 रुपये में बिक रहा है।
एक कटोरी में 50 ग्राम दही के 50 रुपये वसूले जा रहे हैं। 100 ग्राम दूध के 25 रुपये और छोटे डिस्पोजल कप में कॉफी के 30 रुपये लिए जा रहे हैं। इसी तरह 80 रुपये में चार पीस चीज टोस्ट और 70 रुपये में चार पीस जैम टोस्ट दिए जा रहे हैं। बड़ा सवाल यह भी है कि इतनी लूट-खसोट से प्रशासन बेखबर है या कुछ जानने की जहमत नहीं उठाई रही।
यहां चलने वाले ढाबा संचालक सरकार को किसी प्रकार का टैक्स नहीं चुकाते। बावजूद इसके वसूली में इन्होंने स्टार होटलों को भी पीछे छोड़ दिया है। जिला प्रशासन हर तीन माह बाद रेट लिस्ट तो जारी करता है लेकिन इस पर अमल करवाने वाला कोई नहीं है। एसडीएम मनाली ज्योति राणा ने बताया कि वह खुद मौके पर जाकर जांच करेंगी।
उन्होंने कहा कि मनमानी वसूली करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।बीते माह हालात का जायजा लेने पहुंची एनजीटी टीम भी यहीं पर जलपान के लिए रुकी थी। प्रशासन का अमला भी कई बार यहां रुककर जलपान कर चुका है। लेकिन कोई कुछ नहीं बोला। ऐसे में सवाल यह है कि या तो ढाबा मालिक इनसे बिल नहीं लेते या इन्हें सामान्य रेट पर सामान दिया जाता है। लेकिन पिस तो पब्लिक रही है।