ओशो की निजी सचिव रहीं मां योग नीलम(फाइल)
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हिमाचल प्रदेश के ओशो निसर्ग हिमालय केंद्र धर्मशाला की संस्थापक और ओशो की निजी सचिव रहीं मां नीलम का धर्मशाला में निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थीं। जानकारी के अनुसार वह करीब 72 वर्ष की थीं। ओशो से उनकी मुलाकात 1969 में लुधियाना में हुई थी। उन्होंने वर्ष 2000 में जिला मुख्यालय के साथ लगते शीला में ओशो निसर्ग ध्यान केंद्र बनाया था और वहीं रह रहीं थीं। दो मई को उनका निधन हो गया था। 19 मार्च, 1949 को जन्मी नीलम ने 1972 में संन्यास ले लिया। नवंबर 1985 में ओशो के साथ भारत लौटीं और फिर उन्हें भारत के लिए उनके निजी सचिव के पद पर तैनात किया गया।
1985 में ओशो के साथ अमेरिका से लौटी थीं
नवंबर 1985 में वे ओशो के साथ भारत लौटीं और फिर उन्हें भारत के लिए ओशो की निजी सचिव के रूप में नियुक्त किया गया। ओशो ने उन्हें इनर सर्कल के सदस्य के रूप में भी नियुक्त किया था। 1990 में जब ओशो का निधन हुआ तो मां योग नीलम पुणे कम्यून में रहीं और ओशो के कामों को आगे बढ़ाती रहीं। 1996 से 1999 तक, वे हर साल यूरोप के आठ विभिन्न देशों की यात्रा कर प्रमुख ध्यान कार्यक्रम में भाग लेती थीं।
नया केंद्र बनाने में विनोद खन्ना ने मदद की थी
साल 2000 में मां नीलम ने पूर्व सांसद एवं अभिनेता विनोद खन्ना के सहयोग से शीला में ध्यान केंद्र का निर्माण किया और यहां की संस्थापक रहीं। जिस समय उनकी मौत हुई, उस समय उनकी बेटी भी उनके साथ थीं। उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया है। वह भारत सहित कई देशों में जाकर ओशो की टीचिंग और मेडिटेशन सिखाती थीं।