सोमवार को पहले दिन विधानसभा अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल के प्रश्नकाल शुरू करने के एलान से पहले ही मुकेश अग्निहोत्री ने मुख्यमंत्री पर दुुराचार व हत्याओं की बढ़ती संख्या, बिगड़ती कानून व्यवस्था और चार्जशीट की जांच कराने संबंधी बयानों जैसे मुद्दों पर जबरदस्त हमला किया।
इस बीच सत्ता पक्ष से उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर के साथ कुछ विधायकों और कांग्रेस विधायकों के बीच जवाबी नारेबाजी शुरू हो गई। इसके बाद विपक्षी विधायकों ने वाकआउट किया और विधानसभा भवन की सीढ़ियों पर ही धरने पर बैठ गए।
उधर, सदन में पहले ही दिन विपक्ष के हंगामे से मुख्यमंत्री खासे नाराज दिखे। विपक्ष के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि वह किसी को कभी धमकी नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारें मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में पिछली सरकारों के निर्णयों को निरस्त करने और चार्जशीट की जांच व मामले दर्ज करने के फैसले लेती थीं, लेकिन इस बार सत्ता ही नहीं पीढ़ी भी बदलने के साथ हमने पहली बैठक में वरिष्ठ नागरिकों की आयु सीमा 80 से 70 साल करने जैसा लोकप्रिय फैसला लिया।
यह भी निर्णय किया कि चार्जशीट की जांच बदले की भावना से नहीं होगी। बाबा रामदेव को दी जमीन पर उन्होंने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के बनाए नियमों और फैसलों के आधार पर ही बाबा को हिमाचल में स्वास्थ्य व सामाजिक क्षेत्र में काम करने के लिए जमीन दी जा रही है। हेलीकाप्टर के दुरुपयोग पर कहा कि दूसरे प्रदेशों की सरकारों के पास अपने एक नहीं दो-दो हेलीकाप्टर हैं। लेकिन हम पिछली सरकार की ओर से लीज पर लिए हेलीकॉप्टर का ही उपयोग प्रदेश हित में कर रहे हैं।
सदन के बाहर भी विपक्षी विधायकों ने ‘जयराम सरकार मुर्दाबाद’ के पोस्टर हाथ में लेकर सरकार पर चार्जशीट के बहाने धमकाने, बाबा रामदेव को नियम दरकिनार कर जमीन देने और फायदा पहुंचाने, साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये का लोन लेने और वित्तीय स्थिति को और खराब करने, दो
हेलीकाप्टर लेने और उनका दुरुपयोग करने, कानून-व्यवस्था बिगड़ने जैसे मुद्दों पर जमकर हमला किया। स्कूल वर्दी को लेकर भी उन्होंने सरकार को जमकर घेरा और बच्चों से माफी मांगने की बात कही। इसके अलावा इलेक्ट्रिक बसों की खरीद में गड़बड़ी और आउटसोर्स के नाम पर बैकडोर एंट्री पर विपक्ष गरमाया।