लेकिन, जब विधानसभा अध्यक्ष ने प्रश्न के साथ कांग्रेस विधायकों का नाम पुकारा तो वे सदन में मौजूद नहीं थे। विपक्ष के सदस्य वाकआउट करने के बाद दोबारा सदन के भीतर नहीं आए।
नेता प्रतिपक्ष अपने सदस्यों के साथ सदन के बाहर नेता प्रतिपक्ष के कमरे में बैठ कर सदन की कार्यवाही सुनते और अगले दिन की रणनीति बनाते रहे। कुलमिलाकर 12 मिनट के हंगामे के आगे शीत सत्र के एक दिन के लिए संभावित 1 करोड़ रुपये का खर्चा और जनहित का प्रश्नकाल बौना पड़ गया।
पिछले कुछ समय से हर राजनीतिक मंच पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू और पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के बीच दिख रही तल्खी का असर शीत सत्र के पहले दिन नहीं पड़ा। सदन में पहले दिन सुखविंद्र सुक्खू नहीं आए। आशा कुमारी भी सदन में मौजूद नहीं थी।