अगले पांच साल में शिमला को स्मार्ट सिटी बनाने के सपने देख रहा नगर निगम शहरवासियों को सीवरेज लाइन और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं दे पा रहा है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद टुटू और मज्याठ वार्ड के हजारों लोग आज भी सीवरेज लाइन से नहीं जुड़ पाए हैं।
हर साल लाखों रुपये टैक्स भरने के बावजूद ये क्षेत्र बाकी वार्डों से पिछड़े हुए हैं। निगम ने साल 2015 में दोनों वार्डों के लिए 26 करोड़ रुपये का सीवरेज प्रोजेक्ट तैयार किया था। इसके तहत 3030 मीटर सीवरेज लाइन और भरयाल में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की योजना थी।
बाकायदा मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से इसका शिलान्यास करवाया गया लेकिन प्लांट बनना तो दूर, निगम दो साल में महज 800 मीटर सीवरेज लाइन ही बिछा पाया है। करीब सवा करोड़ रुपये की लागत से लाइन बिछाने का काम इतनी सुस्त चाल से चल रहा है कि इसे पूरा होने में कई साल लग जाएंगे।
वहीं, करोड़ों रुपयों के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए अभी टेंडर तक नहीं हो पाए हैं। पहले जो टेंडर हुए, उसमें ठेकेदार शर्तें पूरी नहीं कर पाए। इलाके के लोगों का कहना है कि टैक्स में जरा सी देरी पर निगम जुर्माना वसूलता है लेकिन खुद सुविधाएं देने में सालों लगा देता है।
आबादी से दूर बिछाई जा रही लाइन
प्रोजेक्ट के तहत अभी टुटू चौक से पावर हाउस तक जो लाइन बिछाई जा रही है वह समरहिल ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़नी है। लेकिन इस लाइन के बिछने से सिर्फ पांच से दस फीसदी आबादी ही लाभान्वित होगी।
दूसरी लाइन जो मज्याठ, टुटू, बंगाला कॉलोनी होते हुए भरयाल ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़नी है, उसका काम शुरू ही नहीं हुआ। इससे करीब 80 फीसदी आबादी प्रभावित होगी। इसके अलावा विजयनगर, दिव्य नगर आदि के लिए अभी सीवरेज लाइन की कोई योजना ही नहीं बनी है।
सदन में गरमा चुका है मामला
सीवरेज प्रोजेक्ट का मामला निगम की मासिक बैठक में भी गरमा चुका है। मज्याठ वार्ड पार्षद दिवाकर शर्मा ने लेटलतीफी को लेकर निगम पर सवाल उठाए थे। इस पर अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र गिल ने कहा था कि रेलवे और दूसरे विभागों की आपत्ति के चलते लाइन नहीं बिछ पा रही। लेकिन पार्षद ने सवाल खड़े किए थे कि ऐसा नहीं है। निगम खुद काम में देरी कर रहा है। लाइन बिछाने के लिए दो मजदूर लगा रखे हैं।
क्या कहती हैं मेयर
नगर निगम शिमला की मेयर कुसुम सदरेट सीवरेज लाइन का काम जल्द पूरा करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। दो साल में काम पूरा क्यों नहीं हुआ, ये हम नहीं बता सकते। हमने जून से कार्यभार संभाला है और तब से हर प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने के लिए अफसरों को कह रखा है।
पानी की सुविधा के लिए भी शर्तें
मज्याठ मर्ज एरिया में शामिल है। यहां लोगों को निगम से पानी का कनेक्शन लेने के लिए आईपीएच से एनओसी लेनी पड़ती है। यानी आईपीएच का पानी छोड़ने पर ही निगम पानी की सप्लाई देता है। लोगों का कहना है कि आईपीएच से एनओसी की शर्त गलत है। निगम जब टैक्स लेता है तो बिना शर्त पानी के भी कनेक्शन दे।