बर्मा पापड़ी के स्कूल परिसर में सफेदे और सिंबल के पेड़ों पर छह दर्जन से अधिक चमगादड़ों ने डेरा जमाया है। हालांकि, गर्मी के मौसम में अकसर चमगादड़ों की मृत्यु होती रही है, लेकिन एक साथ कई चमगादड़ों के मरने का मामला बुधवार को पहली बार सामने आया था।
जिला प्रशासन ने स्पेशल टीम मौके पर भेजी थी। बर्मा पापड़ी स्कूल की प्रधानाचार्य सुपर्णा ने बताया कि वीरवार सुबह एक चमगादड़ की मौत हुई थी। इसे वन विभाग के कर्मचारियों ने दबा दिया था। स्कूल प्रशासन मामले में पूरी चौकसी बरत रहा है।
उधर, उपायुक्त ललित जैन ने कहा कि मृत चमगादड़ों के रक्त के सैंपल लिए गए हैं। स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार चमगादड़ों के मरने से किसी भी प्रकार के निपाह वायरस फैलने की कोई आशंका नहीं है।
पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने चमगादड़ों के रक्त के नमूने लिए हैं, जिन्हें अधिकारी स्वयं पुणे प्रयोगशाला में ले जा रहे हैं। मृत चमगादड़ों को वन विभाग के कर्मचारियों ने दफना दिया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री विपिन सिंह परमार ने कहा कि निपाह वायरस फैलने की आशंका को लेकर सरकार सजग है। उन्होंने कहा कि इस वायरस से निपटने को सरकार टास्क फोर्स बनाएगी।
यह सीएमओ के नेतृत्व में बनेगी। परमार ने कहा कि राज्य के तमाम सीएमओ को इस बाबत निर्देश जारी कर दिए गए हैं। दक्षिण भारत में इस वायरस के सामने आने के बाद ये सैलानियों के साथ हिमाचल भी आ सकता है।
यह चमगादड़ से होता है। सिरमौर जिले के पांवटा साहिब में चमगादड़ों के मरने के मामले में भी जांच होगी। पता किया जा रहा है कि क्या इनके मरने की वजह ये वायरस है या ये किन्हीं अन्य कारणों से मरे हैं।
मंत्री ने कहा कि निपाह वायरस बीमारी का राज्य के किसी भी भाग से कोई भी मामला सामने नहीं आया है। किसी भी आशंका अथवा सुझाव के लिए टॉल फ्र ी नंबर 104 पर संपर्क किया जा सकता है।
ऊना जिले से भी आज कुछ चमगादड़ों की मौत का मामला सामने आया है। इस मामले में निर्धारित दिशा-निर्देशानुसार स्थानीय अधिकारियों द्वारा जांच की जा रही है।
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने वीरवार को कहा कि केरल में निपाह वायरस का प्रकोप एक ‘स्थानीय’ घटना है और हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूल परिसर में मृत पाए गए चमगादड़ों की खबर से लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि मृत चमगादड़ों को राष्ट्रीय जांच संस्थान (एनआईवी) में भेजा गया है। इसके अलावा कुछ नमूनों को एनआईवी में परीक्षण के लिए भेजा गया है, ताकि उनकी मौत के पीछे कारण पता चल सके। उन्होंने कहा कि लैब्रटॉरी रिपोर्टों के बिना यह नहीं कहा जा सकता कि इन चमगादड़ों की मौत निपाह वायरस के कारण हुई है।