साहसिक गतिविधियों के लिए विख्यात कुल्लू घाटी में हो रहे हादसे सैलानियों के साथ पर्यटन कारोबार के लिए भी घातक साबित हो रहे हैं। रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और ट्रैकिंग सैलानियों की जान पर भारी पड़ रही है।
इसका एक बड़ा कारण सैलानियों को आधे-अधूरे नियम बताना और जाने से पहले उन्हें ट्रेनिंग न देना है। ब्यास की लहरों में हुए इस हादसे से पहले अगर सैलानियों को हादसा होने पर कैसे बचा जाए इसकी ट्रेनिंग दी गई होती तो शायद महिला की जान नहीं जाती।
पहाड़ों में ग्लेशियरों के पिघलने से ब्यास नदी का जलस्तर भी आजकल उफान पर है। ऐसे में राफ्टिंग के दौरान सैलानियों को उनकी सुरक्षा को देखते हुए गाइडलाइन को पूरा नहीं किया जा रहा है। राफ्ट पलटने पर सवारियों को कैसे तैरना चाहिए, राफ्ट को पकड़कर रखना चाहिए और वह बिना डरे हाथ-पांव मारे इसके बारे में नहीं बताया गया था।
जिला कुल्लू में रिवर राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग गतिविधियां बड़े पैमाने पर की जाती हैं। इसमें करीब डेढ़ हजार युवा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार कमा रहे हैं। पिछले दिनों भी डोभी पैराग्लाइडिंग साइट में एक पर्यटक की मौत हो गई जबकि एक ट्रैकर की खाई में गिरने से मौत हो गई थी। अभी तक दर्जनों सैलानी अपनी जान गंवा चुके हैं।
कुल्लू वैली राफ्टिंग ऑपरेटर एसोसिएशन के प्रधान श्याम अत्री ने कहा कि राफ्टर प्रदेश सरकार की गाइडलाइन का अनुपालन कर रहे हैं। उधर, उपायुक्त कुल्लू यूनुस ने कहा कि रिवर राफ्टिंग संचालक सरकार की गाइडलाइन के तहत काम कर रहे हैं कि नहीं इसके निरीक्षण करने के आदेश जारी किए हैं। उन्होंने कह कि इस हादसे की जांच चल रही है।