सीजन शुरू होते ही सेब की पैकिंग के लिए पेटियां (कार्टन) बनाने की मांग आने लगी है। बीबीएन क्षेत्र के उद्योगों को ये ऑर्डर मिल रहे हैं। हर साल सेब सीजन के लिए चार करोड़ कार्टन की मांग रहती है। इस बार भी इतना ही लक्ष्य रखा गया है, लेकिन उद्योगों को अभी एक करोड़ गत्ते की पेटियां बनाने का ऑर्डर मिला है। रोजाना हजारों कार्टन तैयार किए जा रहे हैं।
सेब कार्टन तैयार करने का ऑर्डर बीबीएन के ज्यादातर उन्हीं उद्योगों को मिल रहा है, जो ऑटोमेटिक पेटियां तैयार करते हैं। सेमी ऑटोमेटिक और सामान्य उद्योगों के पास कार्टन की मांग कम आ रही है। वहीं, कच्चा माल महंगा होने के कारण वर्तमान में 54 रुपये में डिब्बा तैयार हो रहा है। यह पिछले साल की तुलना में सात रुपये मंहगा है।
उद्योगपतियों के अनुसार बागवानों का मनाना है कि ऑटोमेटिक उद्योग से निकलने वाली गत्ते की पेटियां सूखी और गुणवत्ता में बेहतर होती हैं। इनकी फिनिशिंग भी बेहतर होती है। इसके चलते इन उद्योगों को ऑर्डर मिल रहे हैं।
प्रदेश में करीब 250 गत्ता उद्योग हैं। इनमें करीब एक दर्जन ऑटोमेटिक हैं, जबकि अन्य उद्योग सामान्य हैं। वर्तमान में इन्हीं एक दर्जन उद्योगों में कार्टन के ऑर्डर आ रहे हैं। कुछ सामान्य उद्योगों को भी गत्ते की पेटियां तैयार करने के ऑर्डर मिले हैं।
उद्योगों के पास सेब के लिए पेटियां तैयार करने की मांग आनी शुरू हो गई है। गत्ते के डिब्बे पर सरकार ने 18 फीसदी जीएसटी लगाया है। इससे गत्ता महंगा भी हो गया है। इससे बागवानों पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
- आदित्य सूद, प्रदेश अध्यक्ष, गत्ता उद्योग संघ
ऑटोमेटिक और अन्य उद्योगों ने सेब की पेटियां तैयार करने का कार्य शुरू कर दिया है। गत्ता संचालकों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री से मिलेगा और जीएसटी कम करने की मांग उठाएगा। कई अन्य मांगें भी उठाई जाएंगी।
- सुरेंद्र जैन, पूर्व अध्यक्ष