शैक्षणिक सत्र 2018-19 से प्रदेश में शुरू की गईं प्री प्राइमरी कक्षाओं में बीते दो साल के दौरान 43 हजार बच्चों ने दाखिले लिए हैं। बैजनाथ से विधायक मुलखराज के सवाल का लिखित जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बताया कि साल 2018-19 में नर्सरी-केजी में 27 हजार और 2019-20 में 16 हजार बच्चों ने नर्सरी में दाखिला लिया।
इससे नामांकन में आशातीत वृद्धि दर्ज की गई है। सभी स्कूलों में लाइब्रेरी, 2137 स्कूलों में आईसीटी प्रयोगशाला, 36 भाषा प्रयोगशाला का प्रावधान किया गया है। कक्षा से छह से आठ के बच्चों के मूल्यांकन को प्रभावी बनाने के लिए प्रश्न बैंक तैयार किया है। ज्वॉय आफ लर्निंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। गणित और अंग्रेजी की संपर्क किट दी गई है।
शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बताया कि प्रदेश के सभी निजी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि छात्रों से भवन निधि, विकास निधि व अवसंरचना निधि न वसूलें। नालागढ़ से विधायक लखविंद्र सिंह राणा के सवाल का लिखित जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि निजी स्कूल प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि स्कूल की फीस व निधियां शोषण करने वाली न होकर शिक्षा के प्रसार में सहयोग देने वाली हों।
कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन अवसंरचना के विकास और छात्रों को दी जा रही सुविधाओं और क्रियाकलापों के अनुरूप होनी चाहिए। निजी स्कूलों को प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान (विनियमन) अधिनियम 1997 की अनुपालना सुनिश्चित करने को कहा है। स्कूलों में जनरल हाउस का आयोजन कर अभिभावकों की सहमति से ही फीस व फंड का निर्धारण करने के निर्देश दिए गए हैं।
बीएड के अलावा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा संचालित पाठ्यक्रमों में अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने विधायक पवन कुमार काजल के सवाल पर लिखित में यह जानकारी दी। बताया कि बीएड पाठ्यक्रम एनसीटीई के नियमों के अनुसार चलता है।
इसमें दर्शाया गया है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी, पीडब्ल्यूडी और अन्य श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण केंद्र और राज्य सरकार के प्रचलित नियमों के अनुसार होगा। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा बीएड पाठ्यक्रम के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग को 15 प्रतिशत का आरक्षण सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के तहत दिया जाता है।