फतेहपुर के गांव वडियाली की प्रीति पठानिया ने ढाई वर्ष की रिसर्च के बाद टाइफाइड के मरीजों को महंगे वीडॉल टेस्ट से निजात का हल निकाला है। रिसर्च कर प्रीति ने एक ऐसी बायोमेडिकल डिवाइस तैयार की है जो टाइफाइड के बैक्टीरिया सालमोनेला टाइफी की भी तुरंत पहचान कर लेगी। इस टेस्ट के लिए मरीजों का महज 35 से 40 रुपये खर्चा आएगा।
टेस्ट रिपोर्ट भी 95 फीसदी सही होगी। ईजाद डिवाइस का बाकायदा पीजीआई चंडीगढ़ के मरीजों पर परीक्षण किया जा चुका है। 34 मरीजों पर परीक्षण के बाद इस डिवाइस की रिपोर्ट 95 फीसदी सही पाई गई है। प्रीति की मानें तो अभी तक टाइफाइड की जांच के लिए मरीजों का वीडॉल व टाइफैक्स टेस्ट ही होता है।
इसके लिए करीब 200 से 350 रुपये मरीजों का खर्चा आता है। इस टेस्ट की विश्वसनीयता भी 35 से 40 फीसदी ही रहती है। जबकि नए ईजाद डिवाइस की रिपोर्ट के लिए मरीज को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। महज 8 से 10 मिनट में यह डिवाइस रिपोर्ट देगी।
इसमें सेंसर व नैनो तकनीक का प्रयोग किया गया है। टाइफाइड की जांच के लिए डिवाइस में मरीज का खून डालना होगा। इसमें मौजूद रीडर पुष्टि बताएगा कि खून में बैक्टीरिया है या नहीं। मोबाइल के आकार की इस डिवाइस को आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। इसकी कीमत करीब दस हजार रुपये तक होगी।