प्रदेश प्रशासनिक प्राधिकरण ने खेल विभाग से जुड़े कोचों को वर्ष 1996 से जिला खेल अधिकारियों के बराबर वेतनमान देने के आदेश पारित किए है। प्राधिकरण अध्यक्ष न्यायाधीश विनोद कुमार शर्मा व प्रशासनिक सदस्य प्रेम कुमार की खंडपीठ ने ईश्वर चौधरी व अन्यों द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान यह निर्णय सुनाया।
यह मामला वर्ष 1999 से ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित था। जिसका निपटारा 17 साल बाद हुआ। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार वर्ष 1980 में खेल कोचों व जिला खेल अधिकारियों का कॉमन कैडर था। इस कारण दोनों का वेतनमान भी बराबर था। वर्ष 1982 में युवा सेवा व खेल विभाग के नाम से अलग विभाग की स्थापना की गई।
शिक्षा विभाग में कार्य करने वाले इन खेल कोचों व् जिला खेल अधिकारियों को नए विभाग में भेजा गया। चूंकि नये विभाग के कोई अपने खेल कोचों व जिला खेल अधिकारियों के पदों के लिए कोई भर्ती एवं पदोन्नति नियम नहीं थे इस कारण वर्ष 1980 मे बने पुराने नियमों को ही इस विभाग मे लागू किया जा रहा था। वर्ष 1997 मे इन पदों के लिए युवा सेवा व खेल विभाग द्वारा नए भर्ती एवं पदोन्नति नियम बनाए गए।
इसके बाद जिला खेल अधिकारी के लिए 800-1400 रुपए का वेतनमान व खेल कोचों के लिए 700-1300 रुपये का वेतनमान तय किया किया। वाद में जिला खेल अधिकारी के लिए 2200-4000 का वेतनमान व खेल कोचों के लिए 1800-3200 का वेतनमान संशोधित किया गया जिस कारण यह विवाद पैदा हुआ। ट्रिब्यूनल ने इसे कानून के विपरीत पाते हुए उपरोक्त फैसला सुनाया।