मानवीय परिंदों के साहसिक खेल पैराग्लाइडिंग के लिए विश्व प्रसिद्ध बीड़ बिलिंग घाटी में देश के एकमात्र नेशनल पैराग्लाइडिंग स्कूल के भवन का निर्माण कार्य आखिरकार पांच वर्षों के लंबे अंतराल के बाद शुरू हो गया है । घाटी में 2015 में पैराग्लाइडिंग के पहले वर्ल्ड कप के समापन पर तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने पूर्व मंत्री एवं बीड़ बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के संयोजक सुधीर शर्मा के प्रयासों से देश के पहले इस प्रकार के स्कूल की घोषणा की थी।
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की तरफ से इस स्कूल के निर्माण के लिए नौ करोड़ की राशि स्वीकृत है और इसके लिए प्रदेश सरकार ने करीब 26 कनाल भूमि बीड़ में उपलब्ध करवाई है। अगले साल तक इस स्कूल के भवनों के कार्य के पूरे होने की उम्मीद है। इस स्कूल में साहसिक खेल पैराग्लाइडिंग के गुर सीखने की इच्छा रखने वाले देश-विदेश के पायलट प्रशिक्षण ले सकेंगे। इन प्रशिक्षित पायलटों को भारत सरकार के तहत प्रमाणपत्र जारी होंगे। स्कूल के शुरू होने से पैराग्लाइडिंग के लिए प्रदेश की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और चमक बिखेरगी।
वहीं प्रदेश के पर्यटन में भी यह स्कूल मील का पत्थर साबित होगा। देश के दक्ष पायलट इस स्कूल में प्रशिक्षक के तौर पर तैनात हो सकेंगे और घाटी में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। बीड़ बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के संयोजक सुधीर शर्मा, महासचिव सुरेश ठाकुर, निदेशक अनुराग शर्मा, बिलिंग वैली के सतीश अबरोल, राज अबरोल, ज्योति ठाकुर ने इसे प्रदेश के पर्यटन के लिए संजीवनी करार दिया है। जिला पर्यटन अधिकारी सुनयना शर्मा ने बताया कि आगामी वर्ष तक इस कार्य को पूरा कर लिया जाएगा।