पंचायतों की गड़बड़ी के लिए प्रधान नहीं, बल्कि अधिकारी जिम्मेदार होंगे। सरकार ने इसके लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की है। नवनिर्वाचित प्रधान अपनी पंचायतों में ठेकेदारी भी नहीं कर सकेंगे। ऐसा करने पर प्रधानों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इस बार विकास कार्यों का आवंटन ई-टेंडरिंग से होगा। सरकार ने इसके लिए पंचायतीराज विभाग को खाका तैयार करने के लिए कहा है।
पंचायतीराज मंत्री अनिल शर्मा ने कहा कि 14वें वित्तायोग में पंचायतों को पांच साल में 1800 करोड़ रुपये की राशि जारी होगी। यह पैसा सीधा पंचायतों को भेजा जाएगा। प्रदेश में भले ही पंचायत चुनाव पार्टी सिंबल पर न होते हों, लेकिन प्रदेश पंचायतीराज संस्थाओं में इस बार कांग्रेस विचारधारा के प्रधान उपप्रधान जीते हैं। पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव में कांग्रेस मजबूत हुई है। जनता के विकास को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस को बहुमत दिया है।