हिमाचल के बैंकों का नॉन परफार्मिंग ऐसेट (एनपीए) ढाई हजार करोड़ पहुंच गया है। प्रदेश के सहकारी बैंकों का एनपीए बढ़ाने में बड़ा हाथ है। वीरवार को शिमला में हुई राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 150वीं बैठक में यह खुलासा हुआ। बैठक में बताया गया कि साढ़े छह हजार से ज्यादा मामले तहसीलदार रिकवरी के पास बीते एक साल से लंबित हैं।
इन पर कार्रवाई न होने से एनपीए लगातार बढ़ रहा है। विशेष सचिव वित्त डीडी शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैंकर्स समिति की बैठक में बताया गया कि प्रदेश के बैंकों का एनपीए 5.78 फीसदी पहुंच गया है। सितंबर 2018 तक 2701.05 करोड़ का एनपीए हो गया है। सहकारी बैंकों का एनपीए 11.4 फीसदी है।
जोगिंद्रा केंद्रीय सहकारी बैंक और प्रदेश कृषि ग्रामीण विकास बैंक का प्रदर्शन सबसे निराशाजनक है। कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक और राज्य सहकारी बैंक के एनपीए में भी कमी नहीं आई है। विशेष सचिव वित्त डीडी शर्मा ने सहकारी बैंकों सहित सभी बैंक प्रबंधकों को एनपीए घटाने के लिए विशेष प्रयास करने के आदेश दिए।
बैठक में बैंकों से जुड़ी केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेष सचिव वित्त ने बैंकों से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेक्टर को और अधिक मजबूत करने का आह्वान किया।
बैठक में यूको बैंक के एमडी एके गोयल, आरबीआई के जीएम केसी आनंद, नाबार्ड के सीजीएम रनवीर सिंह, जीएम यूको बैंक जेएन कश्यप, चीफ मैनेजर यूको बैंक सतीश कुमार गुप्ता सहित कई अन्य अधिकारी मौजूद रहे।